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एक श्रोता जीविका मोबाइल वाणी के माध्यम से एक लोक गीत प्रस्तुत कर रही हैं जिसमे यह सभी दीदीयो को सन्देश देती हैं कि जीविका से जुड़ कर किस तरह से हम पैसो का बचत कर सकते हैं।
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जमुई से दिलीप पांडेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि बिहार राज्य में ताड़ की पेड़ की असीम सम्भावना है।ताड़ का वृक्ष बिहार राज्य में ही नहीं बल्कि देश के अधिकांश भागों में सदियों से पाया जाता है।ताड़ को इस धरती का पहला श्रोत माना गया है।इस पेड़ से खाद्य एवं अखाद्य पदार्थ दोनों ही प्राप्त होते हैं ,जिनसे बजार में अच्छा मूल्य मिलता है।ताड़ का पेड़ किसानों के आर्थिक और सामाजिक स्तर को बढ़ाने में भी मदद करता है।ताड़ के पेड़ से नीरा का संग्रह कर उसे साफ़ बर्तन में 110 डिग्री सेंटीग्रेट पर उबाल कर गुड़ बनाया जाता है। प्रति किलो गुड़ उत्पाद के लिए सात -आठ लीटर नीरा की आवश्यकता होती है।
बिहार राज्य के नालंदा जिले से जीविका मोबाइल वाणी के संवाददाता जीतेन्द्र कुमार ने कामयाब दीदीयों की कहानी के अंतर्गत जीविका समूह से जुड़ी महिलाओ से बात-चीत के दौरान रुपसपुर गांव में जगस्ती देवी से बात की जगस्ती देवी ने बताया की ये रौशन जिविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं।उन्होने बताया की जब से जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं,तब से इन्हे बहुत ही फायदा हुआ है,इन्होने बताया की बहुत ही कम ब्याज दर में इन्हे कर्ज मुहैया कराया जाता है, जिससे की इनके छोटे-छोटे रोजगार शुरू हुए है साथ ही बच्चों की पढाई में भी परेशानियां कम हुई हैं।जब से इस समूह से जुडी है इन्होने जमींन खरीदी और मवेशी खरीदे जिससे की इनके रोजगार की समस्या हल हुई है साथ ही इन्होने ये भी कहा की यदि किसी को अपनी बेटियों की शादी करनी है तो वो भी इस सहायता समूह से सहायता ले सकती है।
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