बिहार राज्य के नालंदा जिला से संतोष कुमार मंडल मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि बैंक कोई व्यवसाय या पैसा कमाने का माध्यम नहीं है बल्कि लोगों के जीवन स्तर सुधारने का एक जरिया है। एक समय था कि किसान या मजदूर अपनी खेतीबारी के लिए सेठ-साहुकारों से उधारी लेते थे। इसके बदले उन्हें मोटी रकम ब्याज के तौर पर चुकानी होती थी। लेकिन आज केसीसी, क्रेडिट कार्ड के तहत किसानों को बहुत कम ब्याज पर लोन दिया जा रहा है। लेकिन जानकारी के अभाव में उन तक लाभ नहीं पहुंच रहा। बैंककर्मी जमीनी स्तर तक जाकर उनसे संपर्क साधकर उन्हें इसके लिए प्रेरित करें। क्षेत्रिय प्रबंधक सलीम ने कहा कि बैंक में जमा व लोन वसूली को संतुलित रखें। लोगों को वित्तीय तौर पर साक्षर करने की आवश्यकता है। महज तीन फीसदी ब्याज दर पर ही किसानों को लोन मिलता है। लेकिन इसके लिए समय पर ब्याज का पैसा वापस करना पड़ता है। इसके लिए किसानों को फसल बीमा का भी लाभ मिलता है। जीविका समूह में भी हजारों महिलाओं को निजी रोजगार के लिए बैंक ने वित्तीय सहायता दी है। मुद्रा योजना, स्टैंड अप इंडिया योजना से भी लोग अपना व्यवसाय कर सकते हैं। इसके लिए बैंक प्रबंधकों के साथ समीक्षा बैठक कर प्रपत्र जानकारी लें।
