बिहार के हरनौत प्रखंड से महताब जी ने जीविका मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि उन्होंने हरनौत के बीपीएम जी अभिषेक जी से सरकार द्वारा बाल विवाह एवं दहेज़ प्रथा का साक्षात्कार किया जिसमें बाल विवाह एवं दहेज़ प्रथा समाज के लिए एक कुरीति है और इसके लिए हम सब को कदम उठाने चाहिए। शादी के लिए लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के का उम्र 21 वर्ष होना चाहिए लेकिन यदि लड़की-लड़के की उम्र इससे कम हो तो वह बाल विवाह माना जाता है। हमारे संविधान एवं हमारे कानून में प्रावधान हैं कि ऐसे शादियों को रोका जा सकता है और इसे गैरकानूनी मन जाता है। हमें इसको रोकने सारी दीदियों से अनुरोध है कि हमारे समाज में कहीं भी इस तरह के घटना यदि घटित हो रही है तो इसका विरोध करें और ऐसी शादी में न जाएँ ओर जरुरत पड़ने पर प्रशासन को भी सूचित कर सकते हैं । साथ ही उन्होंने दहेज़ प्रथा के विषय में बताया की दहेज़ समाज के लिए एक अभिशाप है ,इसे रोकना , बंद करवाना और इसे बढ़ावा ना देना हमारे ही हाथ में है।जिस समाज में हमलोग रहते हैं वहां महिलाओं को हीन दृष्टि से देखा जाता रहा है लेकिन समय के अनुसार समाज में बहुत से परिवर्तन हुए हैं,साथ साथ महिलाएँ भी विकास के पथ में आगे बढ़ रहीं है और पुरुषों के साथ कन्धा से कन्धा मिला कर चल रहीं हैं ,इसलिए ऐसी स्तिथि में दहेज़ लेना और देना दोनों ही अपराध है।शिक्षा के क्षेत्र में महिलाये भी उतनी ही आगे जा रहीं है जितने की पुरुष ,क्योंकि दोनों पर खर्च एक समान हो रहा है तो ऐसे में दहेज़ लेन-देन व्यावहारिक नहीं है ।
