बिहार नालंदा से गीता कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सी. एल, एफ की टीम कैसे बनाई जाती है।उन्होंने बताया कि जिस राज्य में ये लोग जाते हैं,वहां तीन -तीन दीदियों का टीम बनाया जाता है।जिसके आधार पर सी. एल, एफ बनता है और जीविका के भैया सम्मान के साथ उन्हें बाहर ले जाते हैं।जिस घर में सुविधा होती है ,वहाँ तीन तीन दीदी को रखा जाता है। सबसे पहले प्लानिंग किया जाता है कि सी. एल, एफ कितने ग्राम संगठन को मिला कर बनाया जा सकता है। जिन ग्राम संगठन को जोड़ने का तय होता है उन्हें दस दिनों तक प्रशिक्षण दिया जाता हैं।प्रशिक्षण के बाद ग्राम सभा का आयोजन किया जाता हैं और सभी निदेशक मंडल को बुलाया जाता है और सी. एल, एफ बनाने की माँग की जाती है।अंत में नामकरण होता है,उसमें से दो -दो दीदी को प्रतिनिधी के लिए चुना जाता है ।