जनांदोलन से टीवी मुक्त समाज का सपना होगा साकार पटना/ 24, मार्च: जनांदोलन से टीबी मुक्त समाज का सपना होगा साकार: मंगल पाण्डेय ने कहा कि टीबी उन्मूलन प्रयासों को लंबे समय तक जारी रखते और इनपर पूर्णत: ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन जी ने हाल ही में साल 2021 को पूरे देश में टयूबरक्लोसिस वर्ष के रूप में मनाये जाने की घोषणा की है. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार में सभी 38 जिलों में रोगी सहायता समूह (पेशेंट सपोर्ट ग्रूप) के माध्यम से पूरे मार्च महीने में अभियान चलाया जा रहा है. पेशेंट सपोर्ट ग्रूप रोगियों, टीबी सर्वाइवर, रोगियों की देखभाल करने वाले लोगों, स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधि, धार्मिक गुरुओं तथा अन्य सरकारी पदाधिकारियों का एक समग्र समूह है. उन्होंने कहा कि मार्च महीने में चलाए जा रहे जनांदोलन में अभी तक कुल 1640 जन-प्रतिनिधि, 232 धर्म गुरु, 1682 टीबी चैंपियन, 4541 ट्रीटमेंट सपोर्टर, 400 मीडिया पर्सन एवं 286 संगठन आदि ने अपनी प्रतिभागिता सुनिश्चित की. इसका लक्ष्य टीबी रोगियों को टीबी के इलाज के बेहतर अनुभवों के प्रति सक्षम बनाना है. इस जनांदोलन में रोगियों को सक्रिय सहभागी माना गया है. यह समूह ना सिर्फ रोगियों व उनकी सेवा-प्रदाताओं को रोगियों के स्वस्थ होने तक भावनात्मक सहयोग प्रदान करता है,बल्कि टीबी से स्वस्थ्य हुए लोगों की सहायता के लिए उन्हें सूचीबद्ध भी करता है. टीबी से जुड़े भेदभाव को दूर करने की जरूरत: राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 तक देश से टीबी को खत्म करने का संकल्प लिया है. इसलिए इस दिशा में हमें मिलकर प्रयास करने होंगे. इस रोग की प्रकृति और चुनौतियां विभिन्न स्तरों पर सामुदायिक भागीदारी की जरूरत को बताती है. इसलिए जनांदोलन के माध्यम से समुदाय को शामिल करना एनटीईपी की सफलता के लिए महत्वपूर्ण रणनीति है. जनांदोलन का लक्ष्य जागरूकता लाने और समुदाय को सशक्त करना है. इसके केंद्र में समुदाय के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने वाले व्यवहार को प्रोत्साहित करना तथा टीबी से जुड़ी भेदभाव की भावना को सूचना, शिक्षा तथा संचार के माध्यम से दूर करना है. टीबी के लक्षणों की पहचान और इलाज से संबंधित आवश्यक जानकारियों के माध्यम से आमजन को सशक्त करने की दिशा में यह पहला कदम है. एक मजबूत संकल्प से लक्ष्य होगा पूरा: इस अवसर पर राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक ने टीबी को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समुदाय की सहभागिता को भी महत्वपूर्ण बताया. स्वास्थ्य विभाग के रोग नियंत्रण सेल के निदेशक प्रमुख डॉ. नवीन चंद्र ने भी लोगों को संबोधित किया. वहीं टीबी के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. बीके मिश्रा ने पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के द्वारा राज्य से टीबी उन्मूलन की रणनीति पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि राज्य में प्रति लाख की जनसँख्या में 150 से अधिक टीबी रोगियों की पहचान कर उनके पूर्ण ईलाज का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए डिटेक्ट, ट्रीट, प्रिवेंट एवं बिल्ड रणनीति को और मजबूत किया जाएगा. टीबी अभियान में बेहतर प्रदर्शन करने वाले हुए सम्मानित: इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चयनित सूचकांकों पर उत्कृस्ट उपलब्धि हासिल करने वाले प्रथम तीन पदाधिकारियों, कर्मियों, रोग मुक्त टीबी चैंपियन एवं यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम में बेहतर योगदान देने के लिए प्राइवेट प्रैक्टिसनर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया. सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के राज्य कार्यक्रम प्रबधंक रणविजय कुमार को मीडिया के माध्यम से टीबी जनांदोलन अभियान में सर्वाधिक सकारात्मक मीडिया कवरेज सुनिश्चित कराने में सहयोग करने के लिए मंगल पाण्डेय ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया. इस दौरान टीबी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रशिद्ध समाज सेवी उपेन्द्र विद्यार्थी, केयर इन्डिया के चीफ ऑफ़ पार्टी श्री सुनील बाबू, केयर इण्डिया के स्ट्रेटेजिक प्रोग्राम मैनेजर संजय सुमन, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ सुब्रम्न्या बीपी, डॉ उमेश त्रिपाठी, क्लिंटन चाइल्ड हेल्थ इनिशिएटिव की डॉ. प्रणति, डॉ. युवराज सिंह सहित अन्य डेवलपमेंट पार्टनर के प्रतिनिधि शामिल हुए.