सिवान: दरौली प्रखंड के पुनक गांव में गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु शिष्य के मधुर संबंध देखने को मिला। गुरु वशिष्ठ दास के वैष्णव शिष्यों ने पान के पत्ते, पानी वाले नारियल , अमृत अमृत फल, कर्पूर, लौंग, इलायची के साथ विधिवत आरती उतार कर गुरुजी का पूजन किया। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शिष्य अपने गुरु का गुणगान करते हुए भजन कीर्तन किए। गुरु शिष्य के आध्यात्मिक संबंधों की खूब चर्चा हुई। दिनेश मिश्र ने गुरू बिन अनुभव निधि तरै न कोई की बात कही वहीं बाबूनाथ तिवारी गुरु तत्व को ही मानवीय चेतना बताया, शिक्षक श्रीकांत सिंह ने कहा कि गुरु के प्रति आस्था में न्यूनता आई है फलस्वरूप जीवन में अशांति, असुरक्षा और मानवीय गुणों का अभाव हो रहा है, सिवान जिला टेट शिक्षक संघ अध्यक्ष रजनीश मिश्र का कहना था कि गुरु हमारे ज्ञानशक्ति पर छाए विषय रूपी अंधकार को हटा देते हैं। गुरु वशिष्ट दास जी अपने श्रद्धालु -भक्त-शिष्यों को सर्वोत्तम बनाने का मूल मंत्र राम नाम का जप दिया। सबके सहयोग से बृहद भंडारे का भी आयोजन किया गया जिसका प्रसाद सभी श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया। इस अवसर पर डॉ. भरत सिंह, राघो दुबे, शुभम दुबे, रामनाथ भक्त, नंदलालजी विंध्याचल, कुशवाहाजी, विपिन बिहारी सिंह, दिलीप ओझा सच्चिदानंद ओझा, नित्यानंद ओझा, मृत्युंजय पांडे बबलू मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
