सिवान: दरौली प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जाए तो आज भी छोटे-छोटे बच्चे जिनको पढ़ाई करना चाहिए वह जलीय जीव खाकर अपना पेट की आग बुझाने में लगे हुए हैं। बढ़ती महंगाई में गरीब परिवारों के पास रोजगार का कोई जरिया नहीं और अपने छोटे-छोटे बच्चों को जलीय जीवो को पकड़ने के कामो में लगा देते और बच्चे भी क्या करें। पेट में दाने नहीं रहे तो कहां किसी को पढ़ाई और लिखाई अच्छी लगती है। हम आपको यह नजारा दरौली- रघुनाथपुर मुख्य मार्ग के बीच सड़क के किनारे का दिखा रहे हैं। इन मासूम बच्चों को देखिए जिस उम्र में इनके हाथों में कॉपी पेन होना चाहिए उस उम्र में यह घोघा चुनकर अपना पेट भरने में लगे हैं। यह छोटे-छोटे बच्चे इस महंगाई में अपने माता-पिता का सहयोग कर रहे हैं, लेकिन यह भी क्या करें इनके पास कोई और चारा भी तो नहीं है। मनरेगा में काम करने वाला मजदूर 194 रुपए प्रतिदिन कमाता है। ऐसे में बढ़ती महंगाई के बीच कैसे अपने बच्चों का पेट पाले। इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
