° कुलपति का आश्वासन से ऐसा प्रतीत होता है कि जल्द शुरू हो सकता है पीजी की पढाई| दरौंदा। सीवान महाराजगंज अनुमंडल मुख्यालय शहर का इकलौता रामविलास गंगाराम महाविद्यालय अपने कृति पर रोना रो रहा है कह दिया जाए तो कोई गलत नहीं होगा सच्चाई तो यह है इस महाविद्यालय में प्राचार्य से लेकर और अच्छे-अच्छे योग्य प्रोफ़ेसर भी हैं लेकिन भगवान को साक्षी मानकर यह बात कह देना और लिख देने में कोई गलत नहीं है की प्रोफेसर आते हैं और दिनभर गप मार कर और चले जाते हैं और फिर बच्चों का फॉर्म भरा जाता है और बच्चे परीक्षा में बैठ जाते हैं | पिछले लगभग 6 या 7 वर्षों से पढ़ाई केवल कागज में ही होती है छात्र छात्राएं कही से कोचिंग कर अपनी पढ़ाई पूरा कर लेते हैं जब टेस्ट की परीक्षा होती है तो बच्चे टेस्ट देने आते हैं प्रैक्टिकल की कॉपी जमा करते हैं फर्म भरने आते हैं और फिर एडमिट कार्ड उठाने आते हैं और परीक्षा में शामिल हो जाते हैं और फिर अपना सर्टिफिकेट लेने कॉलेज में पहुंचते हैं | कालेज की स्थापना 1961 में हुआ तब से लेकर आज तक स्नातकोत्तर की पढ़ाई नहीं हुई ? 1961 में कॉलेज की स्थापना हुई तब से लेकर आज तक इंटर और ग्रेजुएशन के छात्र तो पढ़ लिख गए हैं लेकिन इस महाविद्यालय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई अभी तक नहीं हुई और इस अनुमंडल क्षेत्र की बात करें तो इकलौता एक महाविद्यालय है गोरियाकोठी में जहां सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दो विषय से ही बच्चे स्नातकोत्तर करते हैं जब कि अर.बी.जी.आर. कॉलेज महाराजगंज किसी भी विषय की पढ़ाई नहीं होती हैं | छात्र नेताओं का मिलना और कुलपति का आश्वासन पीजी के छात्रों के लिए बड़ी बात होगी ? ऐसे में छात्र नेता का मिलकर और कुलपति को ज्ञापन देना एक आशा की नई किरण होगी कि इस महाविद्यालय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई प्रारंभ हो जाए यह नयी और महाराजगंज के आस पडोस के विद्यार्थियों के लिए शुभ समाचार है | कुलपति से मिलने के बाद छात्र नेता ने मीडिया से बताया कि कुलपति को ज्ञापन देने के बाद छात्र नेता अमरेश सिंह राजपूत ने मीडिया से बात चीत के क्रम में बताया कि वर्ष 1961 में कॉलेज की स्थापना हुवा था ताकि क्षेत्र के गरीब तबके के लड़के-लड़किया उच्च शिक्षा से वंचित ना हो..लेकिन कई वर्ष बीत गए आज तक स्नाकोत्तर की पढ़ाई चालू नहीं हो सका, उन्होंने कहा कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों में भी बच्चों के भविष्य को लेकर कोई खास चिंता नही है, छात्र नेता ने विश्वविद्यालय प्रशासन पे अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि इस कॉलेज से छोटे-छोटे और नए कॉलेजों को स्नाकोत्तर की पढ़ाई हेतु मंजूरी मिल गया लेकिन आर बी जी आर महाविद्यालय से आज तक सौतेले व्यहार किया गया जो कि घोर निंदनीय और दु:खद है। पीजी की पढ़ाई अगर चालू होती हैं और क्लास करना अनिवार्य कर दिया गया तो खोई हुई छवि पुनः आ सकती हैं, ओ दिन कितना बेहतर था जब सैकड़ों की संख्या में छात्र छात्राओं का झूड़ आता था मगर थोड़ी सी भूल प्राईवेट कोचिंग में भीड़ जूटा दिया है|