महिलाओं ने रखा वट सावित्री का व्रत, बरगद और पीपल की फेरी लगाकर महिलाएं की पूजा-अर्चना सोनपुर---जेष्ठ माह की कृष्ण अमावस्या और सोमवती अमावस्या के अद्भुत संयोग पर सोनपुर प्रखंड के पहलेजाघाट स्थित रामजानकी मंदिर व हरिहरनाथ मंदिर के नारायणी तट पर स्थित पीपर व बरगद के पेड़ के अलावा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने बरगद और पीपल की फेरी लगाकर पूजा अर्चना करते हुए सुखद वैवाहिक जीवन और पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने को वट सावित्री व्रत रखकर वट वृक्ष व सोमवारी अमावस्या का व्रत रख बरगद वृक्ष की विधिवत पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कोरोनावायरस के चलते पिछले 2 वर्षों से महिलाएं घरों में ही इस पूजा को करती थी। लेकिन इस बार महिलाओं में इस त्यौहार को लेकर खासा उत्साह दिख रहा है। महिलाओं ने पूजा में सर्वप्रथम जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भीगा चना, फूल व धूप चढ़ाया। किसी ने वटवृक्ष के तने पर 7 से 13 फेरी और पीपल वृक्ष के तने पर 113 बार कच्चे सूत से परिक्रमा कर पूजा का फल प्राप्त किया । हरिहरनाथ मन्दिर के मुख्य अर्चक सुशील चन्द्र शास्त्री बताते हैं कि इस दिन हर सुहागिन महिलाएं अगर पीपल और मटका धागे बांधकर पूजा अर्चना करते हुए परिक्रमा करती है तो वह सदैव सुहागिन रहेगी उन्होंने यह भी बताया कि सावित्री और सत्यवान की कथा सुनने का विशेष महत्व है। श्रद्धा पूर्वक कथा सुनने वाले लोगों के मनवांछित फलों की पूर्ति भगवान हरि स्वयं करते हैं। सती सावित्री देवी ने इसी दिन यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थी। इस बार आज के दिन नक्षत्रों का अच्छा संयोग बना है।जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने सुबह 7:12 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग में वटवृक्ष की फेरी लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।सनातन धर्म को मानने वाली महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पति पर आए संकट दूर हो जाते हैं। और वह दीर्घायु प्राप्त करता है।