निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता हमारे लोकतंत्र की है आवश्यकता जितनी स्वतंत्र पत्रकारिता होगी उतना ही प्रजातंत्र भी सुदृढ व खुशहाल होगा ---संजीत कुमार सोनपुर ---देश में शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए बनाए गए नियम जो काफी महत्वपूर्ण है । न्यायपालिका, कार्यपालिका ,विधायिका के साथ चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले पत्रकारिता है लेकिन यह सभी धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को खो रहा है । हर जगह में भ्रष्टाचार का दीमक धीरे-धीरे इसा स्तंभ को खत्म कर रहा है । सबसे ज्यादा असुरक्षित अगर है तो वह चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारिता है इसमें वैसे पत्रकारों को जिंदगी और मौत से प्रतिदिन जूझना पड़ता है जब वह जमीनी हकीकत व न्याय पूर्ण रिपोर्टिंग करते हैं तो उन्हें भ्रष्ट लोगों के कारण उनके जिंदगी खतरा में रहती है और कितने लोगों की जान भी चली गई लेकिन इस सारी समस्याओं का निदान करने के लिए ना ही केंद्र सरकार न हीं बिहार सरकार उन पत्रकार को ऊपर विशेष महत्व दे रहे हैं । 5 साल के लिए समाज से चुने जाने वाले जनप्रतिनिधियों को उनकी सुरक्षा ,मानदेय ,पेंशन कई तरह की सुविधाएं सरकार के द्वारा दी जाती है लेकिन उससे ज्यादाई मानदारी ,कर्मठता ,समाजसेवी के रूप में कार्य करने वाले और अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर कार्य करने वाले वैसे सोशल मीडिया ,प्रिंट , इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार बंधुओं को कोई सुरक्षा ना देना कोई व्यवस्था ना करना एवं उनके बृद्धावस्था में कोई सहारा नही मिले जिन्होंने सदैव देश,समाज के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया हो और उन्हें कोई तेरा की सुविधाएं सरकार के तरफ से उपलब्ध ना हो इससे लगता है कि सरकार के कहीं ना कहीं सोच की कमी है । जिन चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों के बदौलत सरकार के द्वारा दी गई विकास योजना की राशि में बंदरबांट का पर्दाफाश करने के साथ-साथ सामाजिक बुराइयों को जड़ से खत्म करने के लिए जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है वे आज अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं क्यो ? संजीत कुमार पत्रकार के कलम से --✍️ कलमकार हूं मैं सच ही लिखता हूं । तुम मेरी बातों को बुरा मानना छोड़ दो । सच लिखने से पहले इजाजत लूंगा तुमसे । तुम एक गलतफहमियां पालना छोड़ दो । क्या बिक जाऊं चंद सोने के सिक्कों में । अरे छोड़ो तुम मेरी कीमत आंकना छोड़ दो। ठीक है कभी एक वक्त की ही रोटी मिलेगी । तू मेरी ननिवालों का हिसाब लगाना छोड़ दो । करूंगा पर्दाफाश सब गुनाहों और घोटालों का । सच पर झूठ की कालिख लगाना छोड़ दो । कभी काटा जाऊंगा , कभी जहर ,तो कभी गोलियों भी खाऊंगा । हा मारा जाऊंगा पर क्या खामोश हो जाऊंगा । रोक लोगे मुझे झूठे ख्वाब सजाना छोड़ दो । तुम मेरी आवाज को कफन में दबाना छोड़ दो । सच के खजाना लेकर घूमता हूं। भर्स्ट लोग हमसे नजर बिछाना छोड़ दो । कलमकार हूं सच ही लिखता हूं और सच ही लिखूंगा । झूठ के तराजू मैं मुझे तौलना छोड़ दो ।
