जिला में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी का पर्व उमंग और उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मंदिरों और विशेषकर जिले भर में स्थित ठाकुरबाड़ी में श्री कृष्ण की रात्रि मे जन्म लेने पर पूजा अर्चना की गई। जन्माष्टमी के मौके पर लोगों विशेषकर महिलाओं ने अपने घरों में व्रत रखा और भगवान से सुख समृद्धि की कामना की। भगवान कृष्ण के जन्म लेने के मौके पर खीरा का उपयोग किया गया । कहा जाता है कि खीरा चढ़ाने से भगवान श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं ।मान्यता है कि जब बच्चा पैदा होता है तो उसको मां से अलग करने के लिए गर्भनाल काटा जाता है। ठीक उसी प्रकार भगवान श्री कृष्ण के रात्रि में जन्म लेने के प्रतीक के रूप में खीरे को डेंटल से काट कर अलग किया गया। यह भगवान श्री कृष्ण को मां देवकी से अलग करने का प्रतीक माना जाता है ।श्री कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर लोगों ने अपने दोस्तों ,परिजनों एवं शुभचिंतकों को शुभकामना संदेश और बधाइयां दी। जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों और ठाकुरबाडी़ को विशेष रुप से रंगीन रोशनी से सजाया गया और वहां देर रात्रि तक भजन कीर्तन चलता रहा।इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।