रेलवे की जमीन पर काबिज लोगों के हटाने की चर्चा के बाद सियासत गरमा गई है। प्रभावित लोग बचाव के लिए भाग-दौड़ शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में सोमवार को वैसे कारोबारियों का एक हुजूम विधायक कृष्ण मुरारी शरण ऊर्फ प्रेम मुखिया से जाकर मिला जो रेलवे की जमीन पर काबिज होकर वर्षों से अपने-अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसे कारोबारी वक्त के साथ-साथ कारोबार के लिए जगह उपलब्ध करवाने की मांग विधायक से की। ढ़ूढ़ने लगे खतियान और पर्चा : कई लोग पूर्व में मार्टिन रेलवे से हुए करार और जमा किए गए रसीद की कॉपी खोजने में जुट गए। कई लोग रेलवे की जमीन पर ही सवाल उठाने लगे। ऐसे लोग जमीन से जुड़े खतियान की खोज शुरू कर दी। मार्टिन कम्पनी द्वारा वर्ष 1939 ई0 में रेल सेवा शुरू करने के बाद शहर के वरुणतल चौराहा से लेकर स्टेशन के पास तक की जमीन को विकसित कर बाजार बसाया था। कम्पनी से जुड़े रेल संबंधी कारोबार को संभवत: वर्ष 1984 में रेलवे द्वारा अधिग्रहित किया गया। अधिग्रहण के बाद रेलवे द्वारा 18 वर्ष बाद रेल सेवा बहाल की गई, लेकिन रेलवे की जमीन पर काबिज लोगों की सुध कभी नहीं ली।
