गंगा नदी में आई उफान के बाद जिलें के महसार और जयमंगला गाँव में धीरे-धीरे गाँव के घरों में बाढ के पानी घुस गए हैं वही, दर्जनों परिवार बेघर हो गए हैं। ऐसे में जनजीवन अस्त–व्यस्त हो गई। लोग ऊंची जगहों पर जाने के लिए मजबूर हैं। इसके साथ ही शेखपुरा से महसार के रास्ते लखीसराय जाने वाली सङको पर भी बाढ का पानी तेजी से बढ रही है महसार गाँव पूर्वी टोला जाने वाली रास्ते भी तालाब में तब्दील हो गई है। पूर्वी टोला में रहने वाली महिला हो या पुरुष, बच्चे हो या बूढे सभी को बाढ के पानी से रास्ते बने तालाब से होकर गुजरना पङता है। गांव में कुछ ऐसे भी घर है जिनके घरों में बाढ के पानी घुसने से खाने-खाने को तरस रहे हैं। बाढ के कहर से महसार के गाँवो में हाहाकार मचा हुआ है. हरोहर नदी के जलस्तर बढने से दर्जनो गांवो बाढ के पानी से भरे पडे़ हैं. हरोहर नदी के जलस्तर बढने से सबसे ज्यादा महसार गाँव में बाढ हाहाकार मचा हुआ है यहां के दर्जनो घरों में बाढ के पानी घुसने से लोग बेघर हो गए हैं जयमंगला में भी बाढ का पानी भयंकर हो रही है. इस वक्त महसार गाँव में बाढ जैसे आफत बनकर आयी है, जिधर देखो, पानी ही पानी है, लोगों के आशियाने पर सैलाब ने कब्ज़ा जमा रखा है। महसार गाँव के बूढे- बुजुर्गो का कहना है कि ऐसा बाढ 1988 में आया है जिसमें काफी जान-माल की नुकसान हुआ था उसके बाद आज 2021 में भी उसी प्रकार के बाढ का पानी तेजी से बढ रही है जिससे महसार गाँव के लगभग एक हजार एकङ में धान की बुयाई की गई थी। जो हरोहर नदी के जलस्तर बढने से सरा खेत जलामंग हो गई है जिससे महसार गाँव के किसानों को लाखों रूपये की नुकसान झेलना पङ सकता है इतना होने के बाबजूद भी ना तो मुखिया देखने को आए हैं और ना तो जिला प्रशासन के कोई अधिकारी मीडिया की आने की खबर सुनने के बाद किसान सलाहकार आकर किसानों को हौसला बढा रहे हैं ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
