जिले में जगह जगह सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु के लिए वट वृक्ष पूजा की। हालांकि वट वृक्ष पूजा की तिथि बृहस्पतिवार को भी मानी जा रही है। इस लिए बृहस्पतिवार को भी यह पूजा कई जगह मनाई जाएगी। उधर शेखोपुरसराय प्रखंड के गांवों की महिलाओं ने अपने पति के दीर्घायु होने के कामना करते हुए सोलह श्रृंगार कर वट वृक्ष की पूजा अर्चना की । इस बाबत नीमी देवी स्थान के पुजारी संतोष पाण्डेय ने बताया की इस व्रत को खास कर सुहागिन महिलाएं अपने पति के दीर्घायु होने के लिए रखती है। इस व्रत को जेष्ठ महीने के अमावस्या तिथि को सोलाह श्रृंगार से सुसजित हों महिलाएं विधिवत वट सावित्री की पूजा अर्चना कर कथा श्रवण करती है। उन्होंने बताया के इस व्रत को पतिव्रता स्त्री सावित्री ने सर्वप्रथम कर अपने पति सत्यवान को पुनर्जीवित कर लिया था। सावित्री ने अपने मृत पति के जीवित करने के लिए यमराज से याचना की थी। जिस पर यमराज खुश हो कर सावित्री को उनके पति का प्राण पुनः लौटा दिया था। यम ने सावित्री को तीन वचनों को देकर उनके सद्बुद्धि का इस्तेमाल कर उनके पति को पुनर्जीवित करवा दिया था। आज भी भारतीय संस्कृति का यह पावन व्रत भारतीय महिलाओं के द्वारा हर्षो उल्लास के साथ किया जाता है ।विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।