मनरेगा में भ्रष्टाचार किसी से छुपा हुआ नहीं है, जिसका खामियाजा सबसे ज्यादा दलित आदिवासी समुदाय के सरपंचों और प्रधानों को उठाना पड़ता है, क्योंकि पहले तो उन्हें गांव के दबंगो और ऊंची जाती के लोगों से लड़ना पड़ता है, किसी तरह उनसे पार पा भी जाएं तो फिर उन्हें प्रशासनिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस मसले पर आप क्या सोचते हैं? क्या मनरेगा नागरिकों की इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम हो पाएगी?
जिला मुंगेर से अबोध ठाकुर मुंगेर मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है की मुंगेर जिला के सदर प्रखंड में पड़ने वाले निचले ग्रामीण क्षेत्रो में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। जिला मुख्यालय दूर टीकाराम, भेलवा ,झउवाबाजार ,तोपदियारा ,चीरौंद इन टोली गांवो में जलस्तर बढ़ने से जनजीवन अस्त-वयस्त हो गया है मवेशी का चारागार डूब जाने से किसान मवेशी को लेकर सूखे जगह पर पलायन कर रहे है। उन्हें घर परिवार की चिंता अलग सता रही है।अभी सावन है बाढ़ माह भादो माना जाता है। लोग भादो माह में बाढ़ की विभीषिका से सहमे हुए है.
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