सदर अस्पताल से रेफर मरीज को एम्बुलेन्स मिलने में फिर से परेशानी होने लगी है। करीब एक से डेढ़ घंटा के बाद डीजल का कूपन मिलता है। जिसके कारण गंभीर स्थिति वाले मरीजों भी एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में मजबूरन निजी एम्बुलेन्स का मरीज सहारा ले रहे हैं। तीन एम्बुलेन्स के भरोसे चल रहा है सदर अस्पताल बताया जाता है कि पूरे जिला में करीब 78 एम्बुलेन्स है। सदर अस्पताल में छह एम्बुलेन्स है। मगर इसमें तीन खराब चल रहा है। यह भी एक परेशानी का सबब बना हुआ है। प्रतिदिन चार से पांच मरीज होते हैं रेफर अस्पताल प्रबंधन के अनुसार जिला से हर रोज करीब 4 से 5 मरीज रेफर होते हैं। मगर रेफर मरीज को हायर सेंटर ले जाने के लिए समय पर डीजल नहीं मिलने से परेशानी हो रही है। यह परेशानी इधर कुछ दिन से हो रहा है। बताया कि डीजल का परमिट एजेंसी को देना है। इधर, सोमवार को भी सदर अस्पताल से केसरिया की रीता देवी को हायर सेंटर रेफर किया गया। वह दर्द से कराह रही थी। इसके बावजूद तीन घंटे बाद उसे एंबुलेंस मुहैया कराया गया। प्रसुता को अस्पताल लाने में हो रही परेशानी प्रसुता को प्रसव पीड़ा होने पर भी एंबुलेंस से काफी विलंब से उसे अस्पताल लाने जा रहा है। जिसके चलते निजी वाहन से प्रसुता को भी प्रसव के लिये आना पड़ रहा है। एम्बुलेन्स चालक भी मौजूद व्यवस्था से परेशान हैं। बताते हैं कि रेफर मरीज एम्बुलेन्स में आ जाते हैं। डीजल के लिए एक से डेढ़ घण्टा इंतजार करना पड़ता है। वेतन भी चार महीने से नहीं मिला है। हल्की गड़बड़ी के कारण कई एम्बुलेन्स खड़ा है। जानकर बताते हैं कि एम्बुलेन्स 102 का संचालन सरकार के द्वारा नामित एजेंन्सी के द्वारा होता है। डीजल एजेंसी के द्वारा जारी कूपन पर मिलता है। पहले भी डीजल मिलने में काफी विलंब होता था। समय पर गम्भीर मरीज जो रेफर होते हैं उनको एम्बुलेन्स नहीं मिलने पर ये लोग निजी एम्बुलेन्स से हायर सेंटर इलाज के लिये जा रहे हैं। इसकी सूचना सिविल सर्जन सहित अन्य अधिकारी को है मगर इस दिशा में पहल नहीं हो रही है।