शहर की हृदयस्थली में अवस्थित मोतीझील अभी भी अतिक्रमण की शिकार है। मोतीझील के किनारे अभी भी अतिक्रमणकारियों ने अवैध रूप से कब्जा जमाया है। मोतीझील में किया गया अतिक्रमण इसके विकास व सौंदर्यीकरण में बाधक बना हुआ है। करीब 300 एकड़ से अधिक में फैले मोतीझील का पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी बहुत ज्यादा महत्व है। लेकिन इसका अतिक्रमण अभी भी शहरवासियों के आंखों में खटक रही है। जबकि इसके विकास की पहल शुरू हो चुकी है। बुडको व नगर निगम के माध्यम से इसके विकास व सौंदर्यीकरण की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। मोतीझील के अतिक्रमणकारी किये गये थे चिन्हित वर्ष 2020 में मोतीझील में तत्कालीन डीएम रमन कुमार के कार्यकाल में150 से अधिक अतिक्रमणकारी चिन्हित किये गये थे। श्री कुमार के स्थानांतरण के बाद तत्कालीन डीएम शीर्षत कपिल अशोक के निर्देश पर अतिक्रमण हटाया गया था। तत्कालीन सदर एसडीओ प्रियरंजन राजू के नेतृत्व में करीब महीने भर चलाए गये अभियान में अतिक्रमण हटाया गया। इसके बावजूद कुछ अतिक्रमण का मामला हाईकोर्ट में चले जाने से उसे नहीं हटाया जा सका। जिससे वह मामला अभी भी जस का तस है। अतिक्रमण नहीं हटाये जाने से मोतीझील की आगामी दिनों मेें आनेवाली खूबसुरती में यह बाधक बना हुआ है। शहरवासियों ने अतिक्रमण हटाओ अभियान में किया था सहयोग मोतीझील से अतिक्रमण हटाने में न सिर्फ जिला प्रशासन बल्कि शहरवासियों ने भी सहयोग किया था। जिला प्रशासन के साथ स्थानीय लोगों ने जलकुंभी हटाने में श्रमदान किया था। तब जाकर मोतीझील का लुक बदलने लगा।