सरकार को भारत रत्न देने के अलावा किसानों को उनके अधिकार भी देने चाहिए , आखिर उनकी मांग भी तो बहुत छोटी सी है कि उन्हें उनकी फसलों का बेहतर मूल्य मिले। हालांकि किसानों की इस मांग का आधार भी एम एस स्वामीनाथन समिति की सिफारिशें हैं जो उन्होंने आज से करीब चार दशक पहले दी थीं। इन चार दशकों में न जाने स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने का वादा करके न जाने कितनी सरकारें आईं और गईं, इनमें वर्तमान सरकार भी है जिसने 2014 के चुनाव में इन सिफारिशों को लागू करने का वादा प्रमुखता से किया था। -------दोस्तों आप इस मसले पर क्या सोचते हैं, क्या आपको भी लगता है कि किसानों की मांगो को पूरा करने की बजाए भारत रत्न देकर किसानों को उनके अधिकार दिलाए जा सकते हैं? --------या फिर यह भी किसानों को उनके अधिकारों को वंचित कर उनके वोट हासिल करने का प्रयास है.
इस संस्था की स्थापना झांसी में 2015 में हुई थी इसके अंतर्गत ग्रामीण परिवेश में रहने वाली महिलाओं और पुरुषों को विभिन्न प्रकार के हुनर सीखा कर बेहतर जिंदगी बसर करने का मौका दे रही है।
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हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे।
जन्म से आठ साल की उम्र तक का समय बच्चों के विकास के लिए बहुत खास है। माता-पिता के रूप में जहाँ हम परवरिश की खूबियाँ सीखते हैं, वहीँ इन खूबियों का इस्तेमाल करके हम अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे सकते है। आप अपने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ाने और उन्हें सीखाने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाते है? इस बारे में 'बचपन मनाओ-बढ़ते जाओ' कार्यक्रम सुन रहे दूसरे साथियों को भी जानकारी दें। अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए फोन में दबाएं नंबर 3.
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रसोई के खराब बर्तन, दरजी की दुकान से निकले हुए कतरन, साइकिल की दुकान से निकले हुए खराब सामान और शराब की बोतलों से अलग-अलग आकर के समान बना रही हैं नीलम सारंगी। उनकी संस्था का नाम "बेकार को आकार" यूं ही नहीं दिया गया है। स्थानीय लोग उसकी सराहना भी करते हैं। नीलम जी अपनी तरह और महिलाओं को यह हुनर सीखा भी रही हैं।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ जीवदास साहू लाही या माहू से फसलों को होने वाले नुकसान एवं उपचार सम्बंधित जानकारी दे रहे हैं । विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें...
उत्तरप्रदेश राज्य के झाँसी ज़िला के बबीना प्रखंड से मोबाइल वाणी संवाददाता अनीस जी की बातचीत झाँसी मोबाइल वाणी के माध्यम से छन्नो कला से हुई। छन्नो कला कहती है कि वो स्वर्गीय श्री बेटीबाई स्वयं सहायता समूह से जुड़ी है। यह समूह में महिलाएँ अपनी रसोई के नाम से एक ढ़ाबा खोल रही है ताकि 10 महिलाओं को रोज़गार मिले। छन्नो कला बताती है कि पंजाब नेशनल बैंक का एक सेंटर में ट्रेनिंग दी जाती है। वहाँ पर मोबाइल वाणी द्वारा कौन बनेगी बिज़नेस लीडर का पैम्पलेट दिया गया। जिसको पढ़कर इन्होने मोबाइल वाणी में अपना रसोई का बिज़नेस आइडिया शेयर किया। इसके बाद कौन बनेगी बिज़नेस लीडर प्रतियोगिता में भाग लिया और विजेता बन गयी । कौन बनेगी बिज़नस लीडर का खिताब जीतने के बाद उनके अंदर उत्साह भरपूर है। अपने सारे ग्रुप को अपने साथ लेकर आगे बढ़ाना चाहती हैं।वो कुछ ऐसा काम करना चाहती थी जिससे महिलाओं का उत्साह बढ़े। महिलाओं का आईडिया था कि यह अपना रसोई ढ़ाबा में बिना लहसुन प्याज़ का खाना परोसा जाए ,उन्हें उम्मीद नहीं था कि यह आईडिया उनका काम करेगा परन्तु यह आईडिया उन्हें सफलता दिलवाई। वहीं एक महिला भावना कुमारी बताती है कि वो सभी महिलाएँ सुबह तैयारी कर लेती है और ढ़ाबा शाम में चलता है। महिलाओं का काम बंटा हुआ है जिससे महिलाओं में मिलजुल कर काम होता है । अभी कारोबार की शुरुआत हुई है और इसे बढ़ाने के लिए पैसे गुल्लक में जमा कर रही है। अन्य महिलाओं को भी अपना ढ़ाबा से जुड़कर काम करने में अच्छा लग रहा है।
