उत्तरप्रदेश राज्य के आजमगढ़ जिले की अनिष्का ने मोबाइल वाणी के माध्यम से एक कविता सुनाया है जिसके बोल है गुजरा हुआ वक्त लौट के आता नहीं आता

और हमारा अरंबर मोबाइल वानी के साथ जाता है , और मैं उसके साथ जाता हूं , इसलिए यह भी एक अच्छी बात है , लेकिन बेवफाई से , मैं घर पर ये खामोशी देता हूं , लेकिन मैं क्या करूं , मैं उसके साथ जाता हूं , हवा से हर घाव की रक्षा करता हूं । रखा है ये पुरत्तर पुरवाई हमेशा चल चल काटी लाना शुरू हुआ था दुआओं खैर खवाई साथ चल सब ए वर्ष की खुशी मनते बहुत कैसे हर वक्त तेरी जुदाई सफर में रफी ए सफर का क्या करते तेरा साया तेरी पा ।

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