बैतूल। श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही रामलीला के 8 वें दिन शनिवार को नवयुवक रामलीला मंडल बरहापुर के कलाकारों ने भरत मिलाप, सीता हरण, हनुमान परिचय, सुग्रीव मित्रता के प्रसंगों का मंचन किया। रामलीला के सातवें दिन शुक्रवार को जहां लोगों ने रामलीला मैदान में श्री राम वन गमन का मार्मिक दृश्य देखा, वहीं आठवे दिन शनिवार को सीता हरण, भरत मिलाप और सुग्रीव मित्रता के मंचन ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। रामायण के इस अति महत्वपूर्ण हिस्से को जीवंत बनाने में रामलीला की टीम ने भी पूरी ऊर्जा झोंक दी थी। सीता हरण का दुखद चित्रण देखकर शनिवार को गंज रामलीला मैदान में मौजूद हर एक श्रद्धालु भावुक हो गया था। पिता के निधन का समाचार देने भरत जी भगवान राम को ढूंढने वन की ओर निकल पड़ते हैं। वे भाव-विभोर होकर अपने भ्राता की तलाश में जंगल-जंगल भटकते है। यह मंचन देख कर दर्शक भी भावविभोर हो जाते हैं। काफी भटकने और तलाश करने पर वे मिलते हैं। अपने अनुज से काफी समय बाद मिलने और दुखद समाचार सुनकर प्रभु श्रीराम भी शोकाकुल हो जाते हैं। साथ ही बड़े होने का कर्तव्य निर्वहन करते हुए गले लगाकर सांत्वना देते हैं। भरत जी उनसे वापस अयोध्या चलकर राजपाट संभालने का आग्रह करते हैं पर पिता को दिए गए वचन को पूरा करने का हवाला देते हुए रामजी अयोध्या जाने से इंकार कर देते हैं। इस पर भरत भी वचन देते हैं कि वे भी गद्दी नहीं संभालेंगे बल्कि उनके लौटने का इंतजार करेंगे और नम आंखें लिए अयोध्या के लिए निकल जाते हैं। -- मायावी रावण ने किया सीता माता का हरण -- इधर, वन में वास के दौरान माता सीता को अचानक स्वर्ण मृग नजर आता है। वे भगवान राम से स्वर्ण मृग के लिए हट करती हैं। भगवान राम उनके हट को पूरा करने मृग के पीछे जाते हैं। उनके काफी समय तक नहीं लौटने पर सीता जी उन्हें ढूंढने के लिए लक्ष्मण जी को भिजवाती हैं। इस पर सीताजी की सुरक्षा के लिए लक्ष्मण जी एक रेखा खींच कर जाते हैं। वे स्पष्ट हिदायत देते हैं कि किसी भी स्थिति में इस रेखा को न लांघे। इसके बाद वहां मायावी रावण साधु भेष में भिक्षा मांगने आता है। वह सीता जी से लक्ष्मण रेखा से बाहर आने का कहता है और रेखा पार करते ही हरण कर लेता है। उन्हें बचाने का प्रयास करने पर रावण जटायु का भी वध कर देता है। -- ब्राह्मण भेष में राम-लक्ष्मण के पास पहुंचे हनुमान जी-- रामलीला में भगवान राम और लक्ष्मण घायल जटायु द्वारा बताई गई दिशा में सीता मैया की तलाश में निकल पडते हैं। रास्ते में उन्हें सुग्रीव मिलते हैं। राजकुमारों को जंगल में भटकते देख कर वे हनुमान जी को उनके बारे में पता करने उनके पास भिजवाते हैं। हनुमान जी ब्राह्मण भेष में राम-लक्ष्मण के पास पहुंचते हैं। भगवान राम अपने परम भक्त को पहचान जाते हैं और हनुमान जी भी वास्तविक स्वरूप में आ जाते हैं। इसके बाद श्री राम और सुग्रीव के बीच मित्रता हो जाती है। सुग्रीव, भगवान राम को व्यथा सुनाते हैं कि कैसे उनके ही भाई बाली ने उनका राजपाट छीन कर उन्हें जंगल में रहने को मजबूर कर दिया। भगवान राम उन्हें राजपाट वापस दिलाने का तो सुग्रीव जी भी सीता मैया की तलाश में सहयोग का वचन देते हैं। -- रामलीला में आज-- रामलीला में आज रविवार 22 अक्टूबर को नवयुवक रामलीला मंडल बरहापुर के कलाकारों द्वारा बाली वध, लंका दहन, रामेश्वर स्थापना, अंगद रावण संवाद का मंचन किया जाएगा।
