मनुष्य के संग में रहकर मनुष्य बन पाना सरल है किंतु ब्रहमनिष्ठ हो पाना अत्यंत कठिन है इसलिए मनुष्य को हमेशा सत्संग में रहने का प्रयास करना चाहिए। उक्त बातें विकासखंड पूराबाजार के अंजना मजरे चौबेपुर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवे दिन कथा व्यास सुरेंद्र जी महाराज ने कहा। कथा व्यास ने कहा कि भगवान का स्मरण अधीर मन से करना चाहिए। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जप करते समय भी संसार का ही चिंतन करते हैं ऐसा करने के कारण जपनिश फल तो नहीं माना जा सकता किंतु जैसा फल मिलना चाहिए वैसा फल नहीं मिल पाता। कहा कि संसार में घटनाएं समान रूप से घटती हैं कोई उस घटना से सुख प्राप्त करता है तो कोई दुखी होता है जबकि संसार में न दुख है न सुख यह सब मन की स्थिति पर निर्भर करता है। जो व्यक्ति भौतिकता से परे होकर अपना तन मन धन सब परमात्मा को समर्पण कर देता है