कथाव्यास ने कहाकि भगवान केवल भाव के ही भूखे होते हैं। भगवान श्री कृष्ण जब विदुर जी के घर आते हैं तो विदुरानी घर पर थी और विदुर जी बाहर जाकर कुछ प्रभु के लिए लेने गए थे। इस बीच अपने आराध्य को सामने पाकर विदुरानी भाव विह्वल हो जाती हैं। ऐसे में घर में रखे पांच केले प्रभु के सम्मुख परोसती हैं लेकिन केला कूड़े में फेंक देती हैं और छिलके थाली में रखती हैं। भगवान बड़े प्रेम से छिलके खाते हैं और केले के स्वाद की तारीफ करते हैं। यही है भगवान का अपने भक्त के लिए प्रेम और ऐसे ही भक्तों के लिए भगवान अवतार लेते हैं । कथाव्यास ने मैत्रेयी महाराज और विदुर जी के बीच हुई वार्ता की चर्चा करते हुए कहाकि भगवान ने यह दुनिया क्यों बनाई,यह तो भगवान की महिमा है और वही जाने, लेकिन यह दुनिया एक नाटक है और हम इसके पात्र, जिसकी कमान ईश्वर के हाथ में है। सुख-दुख मनुष्य के कर्म और भाग्य का फल है।
