उत्तप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से अलोक श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि बच्चों को खेल से कभी नहीं रोका जाना चाहिए। खेल वह है जो बच्चों और बच्चों का विकास करता है जो बहुत अधिक पढ़ते हैं, बहुत अधिक, खेल में रुचि नहीं रखते हैं, वे बहुत जल्दी चश्मा पहनते हैं, वे हमेशा शारीरिक रूप से विकसित नहीं होते हैं। समाजीकरण स्वाभाविक रूप से आता है, इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी महत्वपूर्ण हैं, यह दिमाग को तरोताजा करता है और खेल करके, चाहे वह कबड्डी हो, खो-खो, क्रिकेट, जो भी हो। बच्चों में सभी विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी होता है और शरीर फुर्तीला और फुर्तीला होता है, इसलिए बच्चों को कभी भी किसी माता-पिता या कार के पास नहीं जाना पड़ता है। अगर कोई बच्चा दो घंटे पढ़ता है, तो उसे खेलने के लिए आधा घंटा और एक घंटा दिया जाना चाहिए और बच्चों को खेल खेलना चाहिए। हमारा राष्ट्रीय खेल अब धीरे-धीरे लुप्त हो रहा है, पहले लोग गिल्ली डंडा, कबड्डी, कुश्ती खेलते थे, लेकिन आज के युग में क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ रही है।
