आजकल समाज में महिलाओं की भूमिका तथा भागीदारी पुरुषों की ही बराबर है हमें महिलाओं का साथ देना चाहिए और महिलाओं को शिक्षित करना चाहिए जिससे महिलाएं समाज में एक अपना पहचान स्थापित कर सकें
वर्तमान समय में विश्व भर में तंबाकू की खपत जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखकर हैरानी होती है। तम्बाकू का न केवल शरीर और स्वास्थ्य पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन को भी पूरी तरह से बर्बाद कर देता है। तम्बाकू को मानव शरीर में होने वाली कई घातक बीमारियों का जनक भी कहा जा सकता है।विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाने के लिए हर साल एक अलग थीम होता है और इस बार का थीम है "बच्चों को तंबाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बचाना" है। तो साथियों आइये इस दिवस के अवसर पर हम सभी प्रण लें और विश्व को तम्बाकू के सेवन से मुक्त करने में अपना योगदान दें। धन्यवाद !!
इन दिनों बहुत गर्मी पड़ रही है, तो आइए आज इसके बारे में जानते हैं। आइए देखें कि गर्मियों में अपनी देखभाल कैसे करें गर्मियों के मौसम में हमारा आहार क्या होना चाहिए क्या हमें खाना चाहिए आइए जानते हैं कि कितना तरल पदार्थ पीना चाहिए। खीरा, करेला, तरबूज आदि का सेवन करना चाहिए। ताजा बना खीरा, प्याज, पुदीना, नींबू आदि। कम तैलीय और ठंडा भोजन खाना चाहिए, ताजे फलों का रस जरूर पीना चाहिए, इन गर्मी के दिनों में इन चीजों को नहीं खाना चाहिए क्योंकि इस समय तापमान पैंतालीस है। तीस डिग्री से पचास डिग्री के बीच जाकर, हमें क्या नहीं खाना चाहिए, आइए जानते हैं, ज्यादा तेल, मसाले और बासी भोजन न करें, ज्यादा चाय और कॉफी का सेवन न करें, ठंडे पेय न पीएं। शराब और नशीली दवाओं, जैसे कि सफदीन, से भी बचना चाहिए, जैसा कि खुले में बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थ, जैसे कि कटे हुए फल और अन्य उच्च प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ। वेतन का मतलब है कि शरीर में निर्जलीकरण को रोकने के क्या तरीके हैं, सबसे पहले तो हमें शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए। अधिक से अधिक पानी पीएँ। प्यास न लगने पर भी पानी पीएँ। पानी बेल का शरबत, नींबू का पानी, छाछ, ओ. आर. एस. घोल आदि हमें अधिक पानी वाले फल, खीरा, कड़वा तरबूज, तरबूज, लीची आदि पीना चाहिए और खाना चाहिए। निर्जलीकरण के साथ शरीर में नमक की मात्रा कम हो जाती है। इससे बचने के लिए चीनी नमक का घोल लें और केले को भिगो दें। कुल मिलाकर, हमें शरीर में पानी को कम करने की आवश्यकता है। हम इस गर्मी से तब तक नहीं बच सकते जब तक कि हम जागरूक न हों। आपको भी इस संदेश को जानना चाहिए और लोगों को बताना चाहिए ताकि लोग सतर्क रहें।
आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम सुनेंगे और जानेंगे पैसों के सही निवेश के बारे में
ग्राम प्रधान और ग्राम रोजगार सेवक के द्वारा मनरेगा के नियमों का धज्जिया उड़ाई जा रही है
उत्तर प्रदेश राज्य के अम्बेडकर नगर जिला से अंश श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की महिलाओं की पहचान गुमशुदा एक विषय बहुत ही ज्यादा गंभीर समस्या है क्योंकि समाज में आजकल महिलाओं को उतना महत्व नहीं दिया जा रहा है जितना कि उनको मिलना चाहिए
बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ग्रुप बी और ग्रुप सी कांस्टेबल, एचसी, एएसआई, एसआई के कुल 144 पदों पर काम करने के लिए इच्छुक हैं। वैसे अनुभवी उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त स्कूल या कॉलेज से न्यूनतम 10वी व अधिकतम स्नातक पास किया हो साथ ही पोस्ट से सम्बंधित अनुभव भी होना अनिवार्य है । इसके साथ ही उम्मीदवार की आयु सीमा 18 से 30 वर्ष तक होनी चाहिए । इन पदों पर वेतनमान नियम अनुसार दिया जाएगा।ओबीसी व सामान्य वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 247.20 रुपये व अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 47.20 रुपये है, इच्छुक उम्मीदवार अपना आवेदन ऑनलाइन भर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आवेदनकर्ता इस वेबसाइट पर जा सकते हैं। वेबसाइट है https://rectt.bsf.gov.in/ योग्य उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षण के बाद किया जाएगा।
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा किसान भाइयों को जिंक सल्फेट असली है या नकली उसकी पहचान करने की जानकारी दे रहे हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
भारत में जहां 18वीं लोकसभा के लिए चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों में एक तरफ राजनीतिक दल हैं जो सत्ता में आने के लिए मतदाताओं से उनका जीवन बेहतर बनाने के तमाम वादे कर रहे हैं, दूसरी तरफ मतदाता हैं जिनसे पूछा ही नहीं जा रहा है कि वास्तव में उन्हें क्या चाहिए। राजनीतिक दलों ने भले ही मतदाताओं को उनके हाल पर छोड़ दिया हो लेकिन अलग-अलग समुदायो से आने वाले महिला समूहों ने गांव, जिला और राज्य स्तर पर चुनाव में भाग ले रहे राजनीतिर दलों के साथ साझा करने के लिए घोषणापत्र तैयार किया है। इन समूहों में घुमंतू जनजातियों की महिलाओं से लेकर गन्ना काटने वालों सहित, छोटे सामाजिक और श्रमिक समूह मौजूदा चुनाव लड़ रहे राजनेताओं और पार्टियों के सामने अपनी मांगों का घोषणा पत्र पेश कर रहे हैं। क्या है उनकी मांगे ? जानने के लिए इस ऑडियो को सुने
