दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”

उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के डीग प्रखंड के जंगलपुर ग्राम से मोती मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं को भी जमीनी अधिकार मिल रहा है

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर जिला के मझवां ब्लॉक से चंदा देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से ये कहती हैं कि महिलाओं को भी जमीनी अधिकार मिलना चाहिए। कानूनी तौर पर उनका जमीन पर नाम होना चाहिए।

उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के डीग प्रखंड के जंगलपुर ग्राम से आकांक्षा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इनका किराना का दूकान है।आवास योजना का कोई लाभ नहीं मिला

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर जिला के मझवां ब्लॉक से 28 वर्षीय सुमन मोबाइल वाणी के माध्यम से ये कहती हैं कि महिलाओं को भी जमीनी अधिकार मिलना चाहिए। आगे चल कर वो स्वावलंबी बन सकती हैं

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर जिला के मझवां ब्लॉक से रीता मोबाइल वाणी के माध्यम से ये कहती हैं कि महिलाओं को भी जमीनी अधिकार मिलना चाहिए। जिससे महिला स्वावलंबी बन सके

उत्तरप्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला के मझवां प्रखंड से 30 वर्षीय मनीषा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जमीन में महिलाओं का नाम होना चाहिए ताकि वो आगे चल कर स्वावलम्बी बन सके

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर जिला के कोण ब्लॉक से नीलम मोबाइल वाणी के माध्यम से ये कहती हैं कि महिलाओं को भी जमीनी अधिकार मिलना चाहिए। जिससे की महिला आत्मनिर्भर बनें

कुल मिलाकर, महिलाओं के लिए संयुक्त स्वामित्व सिर्फ़ काग़ज़ी नियम नहीं है, बल्कि समाज को बदलने का एक मज़बूत ज़रिया है। यह महिलाओं को मज़बूत बनाता है, परिवार में संतुलन लाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए बराबरी की एक अच्छी मिसाल पेश करता है। महिलाओं को ज़मीन और संपत्ति में बराबर हक़ देना एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज की ओर बड़ा कदम है। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- क्या आपके परिवार की ज़मीन या घर महिलाओं के नाम पर भी संयुक्त रूप से दर्ज है? *--- अगर नहीं, तो क्या आप संपत्ति में बेटियों और बहुओं को बराबर अधिकार देने पर विचार करेंगे? *--- क्या आप मानते हैं कि महिलाओं को ज़मीन का अधिकार मिलने से परिवार ज़्यादा सुरक्षित और मज़बूत होता है? *--- क्या अगली पीढ़ी को बराबरी की सीख देने के लिए आप संयुक्त स्वामित्व अपनाना चाहेंगे?

उत्तरप्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला के मझवां प्रखंड से 36 वर्षीय गीता मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम कानूनी तौर पर जमीन होना चाहिए जिससे महिला आत्मनिर्भर बन सके