उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के अधिकार की बात अक्सर हम सोशल मीडिया ,टीवी आदि पर करते है पर वास्तव में यह घर से शुरू होता है। जब घर में लड़की और लड़के को अलग नियम सिखाए जाते है ,लड़की चुप रहे और लड़के फैसले करे यही अधिकार का संतुलन बिगड़ने लग जाता है। यहीं से महिला को महसूस होने लगता है कि इनका किसी भी फैसले में शामिल नहीं होना है केवल घर संभालना है। महिला को बात रखने का हक़ हो ,गलती करने का हक़ हो ,सपने देखने का हक़ हो सबसे महत्वपुर्ण महिला को अच्छी बेटी और अच्छी बहु बनने के दबाव से बाहर निकलने का हक़ हो। अगर लोग चाहते है महिला अपने अधिकार जाने तो पहले घर में बराबरी को लागू करना होगा। बदलाव बाहर से नहीं आता ,बदलाव लोगों से ही आता है।