ऐसे किसी भी कानून का संबंध इस बात से नहीं कि आप किस तरह से अपना विवाह संपन्न करते हैं, यह कानून द्वारा लक्षित नहीं है। कानून जो हासिल करना चाहता है वह न्याय की एकरूपता है। मतभेद के समय कोर्ट यह नहीं कह सकेगा कि आप हिंदू हैं इसलिए आप के साथ अलग व्यवहार होगा, आप मुस्लिम हैं इसलिए आपके साथ अलग, आप ईसाई हैं इसलिए आपके साथ अलग व्यवहार होगा... मेरे हिसाब से समान नागरिक संहिता (UCC) का लक्ष्य न्याय की एकरूपता है न कि व्यवहार की एकरूपता: समान नागरिक संहिता (UCC) केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान