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जामिया एलुमनाई एसोसिएशन लखनऊ की ओर से डायमंड पैलेस होटल में रविवार के दिन एलुमनाई मीट का आयोजन किया गया। इस मौके देश और विदेश में बसे जाामिया से तालीमयाफता छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रोग्राम में मुख्य अतिथि के तौर इंटीग्रल यूनिवर्सिर्टी लखनऊ के वाइस चांसलर वसीम अख्तर ने शिरकत की और विशिष्ट अतिथियों में मेंबर ऑफ पार्लियामेंट जावेद अली खां, अमरोहा सांसद दानिश अली, पूर्व मंत्री व विधायक कमाल अख्तर, पूर्व विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली, सीनियर समाजवादी नेता अमीक जमाई व शारिक के अलावा युवा नेता व पूर्व छात्र जावेद उल्लाह मौजूद थे। इस मौके पर इंटीग्रल यूनिवर्सिर्टी लखनऊ के वाइस चांसलर वसीम अख्तर ने जामिया मिल्लिया के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया इल्म व अदब का गहवारा है और जामिया की वजह से ही हम सब यहां मौजूद है। इस मौके पर युवा नेता जावेद उल्लाह ने जामिया एलुमनाई एसोसिएशन संभल की ओर से नुमाइंदगी करते हुए कहा कि जामिया के छात्र आज देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपना परचम लहरा रहे हैं। साथ ही उन्होंने ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस तरह के प्रोग्राम का आयोजन देश के हर हिस्से में होना चाहिए। इससे न सिर्फ नए छात्रों को पुराने छात्रों से मिलने का मौका मिलता है बल्लि उनकी हौसलाअफज़ाई भी होती है। इस मौके पर सभी ने अपने वर्तमान ओहदों को भूलकर जामिया में बिताई अपनी पुरानी यादों को ताज़ा किया।

प्राथमिक विद्यालय सुख खेड़ा में शिक्षण संकुल बैठक फरवरी माह का आयोजन किया गया जिसमें नई पंचायत अमरावली के तहत 11 अप्रैल एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने प्रतिभा किया जिसमें शिक्षा से संबंधित या स्कूलों में जो भी समस्याएं हैं उन विषयों से संबंधित चर्चा की गई।

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...

सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की समझ बढ़ा सकते है।ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? अगर आपके पास भी कोई मज़ेदार कहानी है, तो रिकॉर्ड करें, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।

विकासखंड माल की ग्राम पंचायत अऊमऊ के अमृत सरोवर में युवाओं ने पानी न होने के कारण क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया है या कहें कि युवाओं ने उसे खेल का मैदान बना लिया है क्योंकि यहां पानी कभी नहीं भरता है फिर भी इसे अमृतसरोवर कहा जा रहा है।

विकासखंड माल की ग्राम पंचायत पतौना में जीवीकेएस फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से किसानों को एक दिवसीय औषधि पौधों के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया जिससे किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

विकासखंड माल की ग्राम पंचायत पतौना के पंचायत भवन में औषधीय पौधों की खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिस पर कामिनी सिंह का इंटरव्यू

खींचतान में 1998 में बंद हो गई संतकबीरनगर। पिछले 25 वर्षों से बंद चल रही मगहर कताई मिल के दुबारा चलने अथवा इस जगह पर दूसरा उद्योग स्थापित होने की आस एक बार फिर अधूरी रह गई। कबीर मगहर महोत्सव का समापन करने मगहर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन को लेकर सभी को उम्मीद थी कि इसको लेकर कोई घोषणा हो सकती है। लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इसका जिक्र नहीं किया तो सभी निराश हो गए। मगहर कताई मिल कभी बखिरा के कपड़ा उद्योग के लिए संजीवनी बन गई थी। स्थिति यह रही कि मिल चलने के साथ कपड़ा उद्योग भी तेजी पर परवान चढ़ने लगा। 1990 के दशक में उद्योग चरम पर था। यहां तैयार कपड़े उत्तर प्रदेश ही नहीं पंजाब, महाराष्ट्र , बिहार और पड़ोसी देश नेपाल में बिकते थे। धीरे-धीरे बखिरा कपड़ा उद्योग भी खत्म हो गया। हजारों परिवार बेरोजगार हो गए। तमाम परिवार पलायन कर गए। बखिरा के बुनकर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 1977 में मगहर में कताई मिल की स्थापना की गई थी। उद्देश्य था कि बुनकरों को स्थानीय स्तर पर सस्ता कच्चा माल मिल जाएगा। सस्ती लागत से उनका तैयार माल हाथो हाथ बिक जाता था, लेकिन एसी नजर लगी कि दो दशक में ही मिल बंद हो गई। इससे हजारों लोगों का रोजगार छिन गया। राजनीतिक दलों के लिए यह कभी मुद्दा नहीं बना। किसी ने धरातल पर काम नहीं किया। एक एकड़ में स्थापित है मिल मगहर में लगभग एक एकड़ में स्थापित कताई मिल से प्रत्यक्ष रूप से लगभग पन्द्रह सौ लोगों को रोजगार मिलता था। तीन हजार से अधिक ऐसे थे जिनकी अप्रत्यक्ष रूप से रोजी रोजी-रोटी चलती थी। मिल स्थापना के बाद 20 वर्ष तक लगातार शानदार ढंग से चली। मिल कर्मचारी और प्रबंधन की खींचतान में मिल 1998 में बंद हो गई। इसका प्रभाव सीधे तौर पर नगर तथा आसपास के क्षेत्र पर पड़ा। तमाम लोगों के रोजगार के साधन समाप्त हो गए। ये मिल से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे। संसाधन देने वाले बड़े व छोटे दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ा। बंदी के बाद से रोजगार के लिए लोगों का पलायन शुरू हो गया। हथकरघा उद्योग हुआ प्रभावित मिल चलने से इसका फायदा बुनकरों को सीधे तौर से होता था। बखिरा के बुनकर इशहाक अंसारी ने कहा कि आसपास के क्षेत्र में हथकरघा उद्योग उस समय अपने स्वर्णिम काल के दौर से चल रहा था। कताई मिल के बंद होने से न केवल हथकरघा उद्योग प्रभावित हुआ। लोगों की उम्मीद नहीं हुई पूरी मिल कर्मचारी परवेज ने बताया कि प्रदेश सरकार से उम्मीद थी कि यह मिल चल जाएगी। सरकार से आश्वासन भी मिला था। कुछ मिलों को पुनर्जीवित करने की घोषणा हुई पर उस सूची में मगहर कताई मिल का नाम शामिल नहीं हो सका।