नयागांव स्टेशन स्थित शहीद राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा के पास प्रशासन क्यों नहीं करती है झंडोत्तोलन ? क्यों भूलते जा रहे हैं लोग शहीदों की कुर्बानी सोनपुर कोर्ट । सोनपुर अनुमंडल प्रशासन 26 जनवरी गणतंत्र दिवस और 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी शहीद राजेंद्र प्रसाद सिंह को याद नहीं करते हैं। बता दे कि शहीद राजेंद्र प्रसाद सिंह सोनपुर अनुमंडल के वहैरवागाछी नयागांव के निवासी थे। जिनका जन्म 4 दिसंबर 1924 को हुआ था। उन्होंने 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय के सामने यूनियन जैक के झंडा उतार कर अपने देश का तिरंगा झंडा फहराने के दौरान सात क्रांतिकारी छात्र अंग्रेजों के गोली का शिकार होकर शहीद हो गए थे लेकिन तिरंगे झंडे को झुकना नहीं दिया और उस स्थल पर तिरंगा झंडा गार दिया । उस वक्त उनकी उम्र मात्र 18 वर्ष था। इनका 7 शहीदों के साथ पटना सचिवालय के सामने स्मारक है ।अंग्रेजों की गोली से सातों एक साथ शहीद हुए थे । शहीद राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा नयागांव बाजार के स्टेशन परिसर के पास लगी है। इस स्थल के पास लाइट तो लगी है लेकिन यह मुक दर्शक बनी हुई है । लगी हुई लाईट को जलाने की जरूरत है । शहीद राजेन्द्र प्रसाद के प्रतिमा पर जहां स्थानीय लोग अपने स्तर से समय-समय पर उन्हें याद करते हैं लेकिन अनुमंडल प्रशासन उनकी प्रतिमा की पूजा करने तथा 26 जनवरी और 15 अगस्त को झंडोत्तोलन तक करने की जरूरत नहीं समझती। यह शहीदों के लिए अपमान करने जैसा है । अगर अनुमंडल प्रशासन को झंडोत्तोलन का कार्य क्रम में समय नहीं मिलता तो प्रखंड स्तर के पदाधिकारी को भेज कर शहीद के प्रतिभा के समक्ष झंडोतोलन करवाया जा सकता है । ऐसी व्यवस्था करने के लिए अभी वक्त है । अगर भारतीय प्रशासनिक सेवा के आए युवा अनुमंडल पदाधिकारी सोनपुर निशांत कुमार विवेक चाहे तो नयागांव बाजार स्थित शहीद राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा की पास गणतंत्र दिवस परझंडोत्तोलन करने की व्यवस्था कर सकते हैं। यह शहीदों के सम्मान के लिए जरूरी है क्योंकि यह देश के लिए अपनी सीना तानकर सचिवालय के समक्ष अंग्रेजों की गोली खाए थे। आजादी के बाद से विगत कुछ वर्षों से लोग शहीदों को भूलते जा रहे हैं। यहां तक की अब सरकारी व गैर सरकारी कार्यालय में भी उनकी फोटो फ्रेम लगाकर उन्हें याद नहीं कर रहे हैं । जिन शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति दी है उनका एक ही सपना था कि आने वाली पीढ़ी को अंग्रेजों के गुलाम व अत्यचार से मुक्ति मिले और अत्याचारों और शोषण उनपर नहीं हो और उन्होंने अंग्रेजों के कोड़े खाते -खाते शरीर को लहूलुहान करते हुए भारत माता के रक्षा के लिए अपनी जीवनलीला समाप्त कर दी इतना ही नहीं अग्रेजो के गोली खाकर देश के लिए प्राणों को न्यौछावर कर दिया लेकिन उन्हें अब धीरे-धीरे उनके नाम, उनकी यादें ,उनके किए गए कार्य को लोग भुलते जा रहे हैं और वैसे लोगों को याद कर रहे हैं जिनके शरीर में दाग ही दाग है। इस गंभीर समस्याओं को हर भारतवासियों को सोचने समझने और चिंतन करने की जरूरत है।