चिट फंड स्कीम के तहत कई लोगों का समूह एक निश्चित रकम तय वक्त पर किश्तों में जमा करता है और maturity अवधि पूरी होने पर जमा राशि ब्याज सहित लौटा दी जाती है। भारत में चिट फंड का रेगुलेशन चिट फंड अधिनियम, 1982 और चिट फंड (संशोधन) विधेयक, 2019 द्वारा होता है। लेकिन आए दिन कई संस्थानें चिट फंड के नाम पर फ्रॉड कर गरीब लोगों के करोड़ों रुपए लेकर फरार हो जाती हैं। पिछले पांच सालों में उत्तराखंड में JMCS के धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। इसको लेकर दिल्ली के नांगलोई इलाके से इसी साल जनवरी में पंकज नाम के एक व्यक्ति की गिरफ्तारी भी हुई है। फिर भी JMCS जिला प्रशासन को बिना किसी जानकारी के करीब तीन सालों से कोचाधामन प्रखंड क्षेत्र में सक्रिय था। अपने शुरुआती दिनों में संस्थान ने ग्राहकों को समय पर पैसे वापस कर लोगों का भरोसा जीता और अपना नेटवर्क इलाके में फैलाता गया। नौबत ये हुई कि कोचाधामन के हल्दीखोड़ा, बिशनपुर, चोपड़ा बखारी और सोंथा जैसे मार्केट के दर्जनों छोटे गरीब दुकानदार इसकी चपेट में आ गए।
