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राज्य मध्यप्रदेश के जिला रीवा से शिव कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है बच्चों को स्कूलों में नए सत्र में जाते ही उत्साह और उमंग भी होता है. वही इस समय चिंता होती है क्योकि नए सत्र में जाने के बाद किताब,फ़ीस सभी देना होता है।जब नए सत्र की शुरुआत होती है तो पैसो की भी तंगी हो जाती है वही कई बार बैंको में ज्यादा पैसे नहीं आने से भी फ़ीस अभिभावक नहीं भर पाते है।वही अभिभावक को बच्चे पर ध्यान देने की जरुरत है,उन्हें सही से पढ़ाना चाहिए तथा उनके साथ रहना चाहिए।वही अभिभावक को बच्चो की राय भी लेनी चाहिए की वह किस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते है।अभिभावक को अपने बच्चों के साथ मित्र की तरह व्यवहार करना चाहिए।
जनता की रिपोर्ट चर्चा मंच पर आने वाले सप्ताह हम और आप बात करेंगे, स्कूलों के नए सत्र की तैयारी में जुटे, अभिभावक और बच्चे के बारे में "दोस्तों जैसा कि आप सभी जानते है, कि राज्य के सभी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में एक तरफ जहाँ अभिभावक एवं बच्चो में उत्साह देखने को मिल रहा है, वही दूसरी तरफ उन्हें कई तरह की तैयारियां भी करनी पड़ती है। दोस्तों हम आपसे जानना चाहते है कि नए सत्र के लिए यूनिफॉर्म,किताबें जैसी जरुरी चीज़ो से अभिभावक एवं बच्चे खुद को कैसे तैयार करते हैं ?क्या आज की शिक्षा की शिक्षा सिर्फ नये पुस्तकें,स्कूली पोशाक तक ही सिमट कर रह गयी है ? क्या आज की शिक्षण व्यवस्था में कुछ और सुधार करने की जरुरत है ? एक ही स्कुल में हर साल नए सत्र के लिए नयी पोशाकों और एडमिशन फ़ीस का बोझ अभिवावको पर किस तरह से पड़ रहा है ? साथ ही क्या इन सभी सुविधाओं के बाद भी बच्चो के लिए अच्छी शिक्षा की उम्मीद की जा सकती है? आप हमे ये भी बताये कि नए सत्र की तैयारी में जुटे, अभिवावको और बच्चों को और किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है ?
