छत्तीसगढ़ राज्य के राजनंदन ग्राम से वीरेंदर गंधर्व मोबाइल वाणी के माध्यम से कहना है कि शिक्षा का मतलब चरित्र का निर्माण जो नहीं हो रहा है। कहने का तात्पर्य है कि आज की शिक्षा से लोग डॉक्टर और इंजिनियर तो बन जा रहे है पर उनके माता पिता वृद्धाश्रमों में रह रहे है। पढ़ने के नाम पर लड़का और लड़की जाते तो जरूर है पर प्यार मोहब्बत के चक्करो में पड़ जाते है। इस तरह से आज की शिक्षा से लोग अच्छा कमा और खाना खा रहे है पर उनमे ना ही संस्कार है और चरित्र का निर्माण हो रहा है रही बात आज के शिक्षको की तो आज के शिक्षक भी बच्चो को उसी तरह से पढ़ाते है जिससे उसकी नौकरी लग जाय।
