शुभम की अवैज में एक अच्छा सा गाना काश तू मेरे हक़ में होता बन के यकीन शक में होता काश तू मेरे हक़ में होता बन के यकीन शक में होता तू है मिलो दूर तेरे सं दो पल दो पल चाहा था रुला के गया इश्क़ तेरा रुला के गया इश्क़ तेरा रुला के गया इश्क़ तेरा कैसे चुप कराऊँ मैं यार दी खाबों से ज्यादा आंसुओं से दोस्ती कर बैठे जीने की खवाहिश में लम्हा लम्हा मर बैठे खाबों से ज्यादा आंसुओं से दोस्ती कर बैठे जीने की खवाहिश में लम्हा लम्हा मर बैठे तू ऐसे जुदा हुआ मेरे संग पल दो पल को तो रुला के गया इश्क़ तेरा माने नहीं जो दिल मेरा