सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर दायर याचिका की तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि देश अभी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। जब हिंसा थमेगी, तब उन पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस ने याचिकापर आश्चर्य जताते हुए यह भी कहा, ‘‘पहली बार है जब कोई देश के कानून को संवैधानिक करार देने की मांग कर रहा है, जबकि हमारा काम वैधता जांचना है।जब हिंसा का दौर थम जाएगा, तब कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई करेंगे।याचिका में कहा कि सीएए को वैध घोषित किया जाए। साथ ही राज्यों को भी निर्देश दिए जाएं कि वे कानून को लागू करें। याचिका में यह भी कहा गया कि अफवाहें फैलाने के लिए कार्यकर्ताओं, छात्रों और मीडिया पर भी कार्रवाई की जाए।दिसंबर में संसद में नागरिकता बिल पास होने के बाद से ही पूर्वोत्तर समेत देशभर में हिंसक प्रदर्शन हुए। नरेंद्र मोदी ने नागरिकता संशोधन कानून पर 25 दिसंबर को लखनऊ में लोगों से अपील की। उन्होंने कहा- विपक्षी भ्रम फैला रहे हैं। लोगों को इस भ्रम में पड़कर हिंसा नहीं करनी चाहिए और सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। उधर, एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा- नागरिकता संशोधन कानून में किसी की नागरिकता लेने का प्रावधान नहीं है, नागरिकता देने का प्रावधान है। देश के मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं है। श्रोताओं इस खबर के बाद हमें यह समझना होगा की किसी भी समस्या का समाधान हिंसा नहीं है बल्कि हमें चीजों को समझने की जरूरत है और उन पर विचार करने की। इस विषय से संबंधित अगर आपके पास भी कोई राय और प्रतिक्रिया है तो हमारे साथ साझा करें अपने फोन में नम्बर 3 दबा कर।अगर यह खबर पसन्द आयी तो लाइक का बटन जरूर दबायें।