मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से संवाददाता कालीचरण जी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से जानकारी दी की जल संचय तभी सम्भव है जब लोग प्रकृति के साथ खिलवाड़ करना बंद करेंगे,अगर एक पेड़ काटा जाता है तो उसके बदले दो पेड़ लगाए जाये।जिस प्रकार अपने बच्चों का पालन-पोषण किया जाता है उसी प्रकार पेड़-पौधों का भी पालन-पोषण करना चाहिए।पर्यावरण का दोहन जो हम करते जा रहें है बारिश न होने का और बिन मौसम बरसात होने का यही कारण है ,साथ ही तापमान में वृद्धि भी इसी वजह से हो रही है।कई क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ जल की बहुत कमी है और उन स्थानों पर टैंकरों द्वारा या सरोवरों के द्वारा जल पहुँचाया जाता है।इसलिए जल का संचय आवश्यक है जिससे की सभी लोगो को पर्याप्त मात्रा में जल मिल सके।इन्होने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा की एक नियम बनाया जाये की एक सिमित मात्रा से ज्यादा जल कोई इस्तेमाल न करें और जल की कमी न होने दिया जाए।
