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अपने नन्हें-मुन्नों को दस्त से बचाने के लिए आप क्या करते हैं? क्या इन विडियो में दिए उपायों के बारे में आप जानते हैं और अपने आसपास और भी लोगों को इसकी जानकारी देंगे. अपने अनुभव, कहानियां और अगर दस्त को लेकर कोई सवाल हैं तो वो भी अभी रिकॉर्ड करें और हमारे साथ साँझा करें.

अपने नन्हें-मुन्नों को दस्त से बचाने के लिए आप क्या करते हैं? क्या इन विडियो में दिए उपायों के बारे में आप जानते हैं और अपने आसपास और भी लोगों को इसकी जानकारी देंगे. अपने अनुभव, कहानियां और अगर दस्त को लेकर कोई सवाल हैं तो वो भी अभी रिकॉर्ड करें और हमारे साथ साँझा करें.

फूलों की वर्षा, शरद की फुहार, सूरज की किरणें, खुशियों की बहार, चन्दन की खुशबू, अपनों का प्यार, मुबारक हो आप सबको, बसंत पंचमी का त्योहार श्रोताओं आप सभी को मोबाइल वाणी परिवार की ओर से सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं

हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन पूरे देश में संविधान लागू किया गया है। 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही भारत को पूर्ण गणराज्य घोषित किया गया था। यही वजह है कि हर साल इस खास दिन की याद में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।दोस्तों आप सभी देश वासियों को मोबाइल वाणी परिवार की ओर से गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

वर्ष में एक बार आता है क्रिसमस, लहर खुशी की लाता है क्रिसमस। प्रभु ईसा की याद दिलाता मन को पावन बनाता है क्रिसमस। सभी श्रोताओं को मोबाईल वाणी परिवार की ओर से क्रिसमस पर्व की हार्दिक शुभकामनायें .....

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गर्मियां आ चुकी हैं और तापमान बढने के साथ ही पानी की किल्लतें भी सामने आनें लगी हैं. यह लगभग हर साल का सिलसिला है. मौसम अपने रंग में बारिश को भी धरे हुए है पर हम उसे सहेजते नहीं. वो हवा जो हमें बिना किसी शुल्क के मिल सकती थी आज सिलेंडरों में भरकर बाजारों में बेची और खरीदी जा रही है. यही हाल पानी का भी है. पानी पैक बंद बोतलों में बिकता है और उसकी कीमत हमें तब समझ आती है जब प्यास के कारण गला सूख रहा हो सोचिए अगर पानी को सम्हालकर रखा जाए तो हमें एक एक बूंद की कीमत नहीं चुकानी होगी. पानी को बचाना भी जरूरी है, क्योंकि जिंदगी जरूरी है. यहाँ पर हम पानी के प्रदूषण , घटता जल स्तर , छोटी छोटी नदियों नालो का गायब होना , भूगर्भ जल स्तर में हानिकारक केमिकल का मिलना , पानी बचाने के उपायों , उसके संरक्षण आदि जैसे विषयों पर बातें करेंगे .

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दोस्तों, शिक्षक का पद बहुत ही गरिमामय है, वे हमेशा अपने छात्रों को स्वाभिमानी बनने की शिक्षा देते हैं, सोचिए उनके लिए यह समय कितना विकराल रहा है? स्कूल बंद, कोचिंग बंद, नौकरी नहीं, तनख्वाह नहीं... हाथ खाली और वे बस बेबस! सरकार ने गरीबों को राशन दिया, अच्छी बात है पर एक शिक्षक का आत्मसम्मान तो उसे वहां तक भी नहीं पहुंचा सकता. सरकारी शिक्षकों के पास तो फिर भी तनख्वाह पहुंच रही थी लेकिन संविदा शिक्षक, निजी स्कूल में आॅनलाइन कक्षाएं ना ले पाने वाले शिक्षकों या फिर ऐसे शिक्षक जो छात्रों तक नहीं पहुंच पाए क्या उनके साथ सबकुछ ठीक रहा? अब जबकि हालात सामान्य की ओर हैं, तब भी स्कूलों से शिक्षक नदारद हैं. कुछ ने अपने लिए नए काम की तलाश कर ली है तो कुछ रोजगार की तलाश में हैं. साथियों, हम आपसे जानना चाहते हैं... कि क्या आपने इस कोरोना काल के दौरान आपने शिक्षकों को तलाशने की कोशिश की? क्या आपने उनसे उनका हाल जाना? क्या आपके आसपास ऐसे लोग हैं जो पहले शिक्षक थे लेकिन कोविड काल में नौकरी जाने के बाद अब कोई दूसरा काम कर रहे हैं? क्या आपको नहीं लगता कि सरकार को शिक्षकों की आर्थिक स्थिति सुधारने पर ध्यान देने की जरूरत है? स्कूल बंद होने और शिक्षकों के ना रहने से आपके बच्चों की पढ़ाई पर कितना असर पड़ा है? अगर आप शिक्षक हैं, तो हमें बताएं कि कोविड काल के दौरान आपको किस तरह की परेशानियां आईं और क्या अब आपके हालात पहले जैसे हैं? अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.