प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रामलीला मैदान में एक रैली को संबोधित करेंगे। इसके मद्देनजर क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। नागिरकता कानून के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच यह रैली होने वाली है। माना जा रहा है कि इस रैली में एक लाख से ज्यादा लोग शामिल होंगे। रामलीला मैदान दरियागंज से काफी करीब है, जहां पिछले दिनों हिंसा भड़की थी। भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय गोयल ने एक बयान में कहा कि 1731 अनधिकृत कॉलोनियों के 40 लाख निवासियों को मालिकाना हक देने के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देने के लिए रैली की तैयारी की जा रही है। अनधिकृत कालोनियों के निवासियों द्वारा कुल 11 लाख हस्ताक्षर प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद ज्ञापन के रूप में सौंपे जाएंगे।रामलीला मैदान में पीएम मोदी की रैली से पहले लोगों की भीड़ जमा हो गई है। आज पीएम मोदी यहां एक विशाल रैली को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी की रैली में आए लोग नारे लगा रहे हैं। दिल्ली में ट्रैफिक एडवाइजरी रामलीला मैदान में पीएम मोदी की रैली के मद्देनजर राजघाट से दिल्लीगेट तक किसी भी व्यावसायिक वाहन को जाने की अनुमति नहीं होगी। विवेकानंद मार्ग से कमला मार्केट चौक की ओर जाने वाली डीडीयू मार्ग पर आवागमन प्रतिबंधित। देश के कुछ लोग हैं जो पीएम को धन्यवाद कर रहे हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जो उनके लिए निर्णयों का जोरदार विरोध कर रहे हैं।नागरिकता कानून के बाद जिस तरह के विरोध हो रहे ऐसे में पीएम की यह रैली क्या रंग लायेगी।तो श्रोताओं ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए जुड़े रहे मोबाइल वाणी से और अगर यह खबर पसंद आई तो लाईक का बटन जरूर दबायें।
चीन के दक्षिण पश्चिम हिस्से में स्थित गुईझो प्रांत में एक कोयले खदान में धमाके की खबर है।चीनी मीडिया की मुताबिक, इस घटना में कम से कम 14 खनिकों की मौत की खबर है।वहीं दो अन्य लोगों के खदान के अंदर फंसे होने की खबर है।दक्षिणपश्चिम गुइझु क्षेत्र की सरकार ने बताया कि अनलोंग काउंटी के गुआंगलोंग खदान में मंगलवार को तड़के विस्फोट हुआ।स्थानीय प्राधिकारियों के अनुसार सात लोगों को दुर्घटना के बाद बाहर निकाला गया है।सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देशों का पालन सही तरीके से नहीं होने के कारण चीन में खदानों में इस तरह की घटनाएं लगातार होती रहती हैं।इस दुर्घटना से कुछ दिन पहले ही दक्षिणपश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत में एक खदान में बाढ़ जैसी स्थिति से पांच लोगों की मौत हो गई थी और 13 खनिक फंस गए थे।तो श्रोताओं ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए जुड़े रहे मोबाइल वाणी से और अगर यह खबर पसंद आई तो लाईक का बटन जरूर दबायें।
तकनीक के क्षेत्र में चीन यूं ही अमेरिका के साथ ही यूरोपीय देशों और जापान को चुनौती नहीं दे रहा है। हमारे यहां छोटी उम्र में बच्चे जहां अंग्रेजी, गणित, नृत्य और संगीत का ट्यूशन लेते हैं और गेम खेलते हैं, चीन में उस उम्र के बच्चे जटिल कोडिंग सीखते हैं।चीन के वीडियो स्ट्रीमिंग साइट बिलीबिली पर वीटा नामक बच्चे ने इस साल अगस्त में कोडिंग ट्यूटोरियल चैनल शुरू किया था। चार महीने में ही उसके 60 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए हैं और 10 लाख से ज्यादा लोगों ने उसकी साइट को देखा है।वीटा इकलौता नहीं है। चीन में उसकी तरह के बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ये है कि प्राइमरी स्कूल में दाखिला लेने से पहले ही वहां बच्चे कोडिंग सीख रहे हैं। इसके पीछे अभिभावकों की बड़ी भूमिका है, जो यह समझ रहे हैं कि चीन सरकार ने जिस तरह से तकनीक को बढ़ावा दे रही है, उस स्थिति में युवाओं को कोडिंग की जानकारी होनी ही चाहिए।कंप्यूटर कोडिंग का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर, वेबसाइट और ऐप बनाने में किया जाता है। कोडिंग के प्रति चीन का मौजूदा उत्साह उसे दुनिया में एआइ का पावर हाउस बना सकता है। कितना अजीब है जहाँ हमारे देश में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रहा वहीं चीन में बच्चे कोडिंग सीख रहे इसमें ना केवल सरकार बल्कि अभिभावकों की भी भुमिका महत्वपुर्ण है। तो श्रोताओं इस खबर के बाद क्या आप भी अपने बच्चों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए उनके दिनचर्या में बदलाव करेंगे.? जैसे कुम्हार कच्ची मिट्टी से कुछ भी बना सकता है वैसे ही अगर हम भी प्रांरभ से ही बच्चों को तकनीक की जानकारी दे तो उनका भविष्य और साथ ही देश का भी विकास हो सकता है। तो क्या हमारे देश में भी बच्चों को शुरूआती शिक्षा के दौरान ही तकनीक की जानकारी दी जानी चाहिए.?आप अपने विचार और अनुभव हमारे साथ साझा करें अपने फोन में नंबर 3 दबा कर।अगर यह खबर अच्छी लगी तो लाईक का बटन जरूर दबायें।
प्रतापपुर में फैली महामारी से जुड़े हालात फिलहाल काबू में है। लेकिन क्या लोग गावँ में फैली इस महामारी का कारण समझकर उसमे सुधार लाएंगे? ये जानने के लिए क्लिक करें।
भारत में मानसून के देर से खत्म होने से ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग का जिम्मेदार कहा जा रहा है। एक विशेषज्ञ के प्रकृति का अध्ययन के बाद यह कहा जा रहा है कि भारत से मानसून का देर से लौटना भी जिम्मेदार है।ऑस्ट्रेलिया में हजारों लोगों को घर से बेघर होना पड़ा और इस आग में तीन लोगों की मौत भी अब तक हो चुकी है।इस आग से वहां के नागरिकों को बहुत दिक्कत हो रही हैं। इसका असर पूरे दुनिया भर में हो रहा है।ट्रेंट पेनहम का कहना है, कि भारत में मानसून के देर से खत्म होने से ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग की जिम्मेदार हैं। भारत में बारिश सितंबर तक थम जाती हैं। ये हवाएं फिर दक्षिण की तरफ बढ़ती हैं। इस वर्ष बारिश भारत में जल्द नहीं थमी जिसे ऑस्ट्रेलियाई के शहर डार्विन में अच्छी बारिश नहीं हुई।पेनहम का कहना है कि इस वक्त ऑस्ट्रेलिया क्षेत्रों में बारिश होती है पर वैश्विक घटना के कारण नहीं हो पाई। इस कारण से ये क्षेत्र गर्म, सूखा और तेज हवाओं का असर ज्यादा हो रहा है। भीषण आग के कारण ये सारी स्थितियां विपरीत अनुकूल होती है जा रही है जो इस वक्त हम देख पा रहे हैं। कितना दयनीय और चिंता का विषय है की हमारे देश का वातावरण दूसरे देश को भी बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। इतनी सारी चीज़ें हम अपने आस-पास देखते और सुनते रहते हैं जो की जलवायु और प्रदूषण के कारण होते हैं फिर भी बदलाव पर्याप्त मात्रा में देखने को नहीं मिल रहा है। अब भी हमारे पास वक़्त है इन समस्याओं से लड़ने का आप हमें बतायें ऐसा क्या करना चाहिए जिससे फिर से मौसम पहले की तरह ही हो जायें जिससे पर्याप्त मात्रा में वर्षा हो.?
Transcript Unavailable.
बंगाल की खाड़ी में निम्न दाब की वजह से पैदा हुआ बुलबुल तूफान आज सुबह तकरीबन साढ़े पांच बजे और भी खतरनाक हो गया है। डिप्रेशन की स्थिति से पैदा हुई तेज हवाएं पहले डिप डिप्रेशन के स्तर तक पहुंची और अब गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गयी है। इस समय चक्रवाती तूफान बंगाल की खाड़ी के द्वीपीय इलाकों से लगभग 530 किमी दूर दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम पर केंद्रित है।भारतीय मौसम विभाग ने अनुमान जाहिर किया है कि बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान बुलबुल आगामी 10 नवंबर के शुरूआती घंटों के दौरान सुंदरवन डेल्टा से होता हुआ पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटवर्ती इलाकों से टकराएगा। बुलबुल तूफान के आने की सूचना भारतीय मौसम विभाग ने तकरीबन चार दिन पहले ही दिया था। बुलबुल तूफान से प्रभावित होने वाले संभावित राज्यों में ओड़िशा, पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश के तटवर्ती इलाके हैं। कहा जा रहा है कि जब बुलबुल तूफान बंगाल की खाड़ी के तटवर्ती राज्यों से टकराएगा तो यहां तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश होगी। बुलबुल तूफान की वजह से सड़क, रेल तथा हवाई यातायात तो प्रभावित तो होगा ही साथ ही बिजली व्यवस्था जैसी मूलभूत जरूरतें भी प्रभावित होगी। बुलबुल बंगाल की खाड़ी में उठने वाला इस साल का सातवां चक्रवाती तूफान है। खराब मौसम में किसी भी अनहोनी से बचने के लिए प्रशासन को क्या तैयारियाँ कर के रखनी चाहिए। ऐसे हालत में आप किस तरह की तैयारियाँ कर के रखते हैं ताकि खराब मौसम से आपका जीवन प्रभावित ना हो।आप अपने विचार और अनुभव हमारे साथ साझा करें अपने फोन में नंबर 3 दबा कर।अगर यह खबर अच्छी लगी तो लाईक का बटन जरूर दबायें।
अचानक से कोई भी कानून जनता के समक्ष ला कर रख दिया जाता है और यह उम्मीद भी करती है प्रशासन की जनता तुरंत ही इसका पालन भी करने लगे। लेकिन क्या यह संभव है। किसी भी कानून के निर्माण और उसके लागू होने से पहले जनता को जागरूक किया जाए तो किसी भी मामले में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
bathanaha, phulpras
क्षेत्रफल की दृष्टि से बिहार देश में तेरहवाँ एवं आबादी की दृष्टि से तीसरा बड़ा राज्य है। राज्य में 5 साल तक के लगभग 1.27 करोड़ बच्चे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के अनुसार राज्य में 5 साल तक 61 लाख यानि 48 प्रतिशत बच्चे बौनापन के शिकार हैं। जबकि देश में 38.4 प्रतिशत बच्चे बौनापन से ग्रसित हैं। बिहार में 60 प्रतिशत किशोरियों एवं महिलाओं में ख़ून की कमी है। राष्ट्रीय स्तर पर कुपोषण एक बड़ी समस्या है साथ ही बिहार भी कुपोषण की दंश झेल रहा है। इससे निजात पाने के लिए भारत सरकार द्वारा मार्च 2018 में राष्ट्रीय पोषण मिशन यानि पोषण अभियान की शुरुआत की गयी है। पोषण माह भी पोषण अभियान का ही हिस्सा है, जिसे पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूरे माह मनाया जाएगा। पोषण माह का आयोजन पोषण अभियान के लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होगा। पोषण के संदेश को जन-प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रसारित करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि पोषण संबंधित योजनाओं को जन-प्रतिनिधि के जरिये आम लोगों तक पहुंचाई जा सकती है। उनकी सहभागिता से सामुदायिक स्तर पर पोषण जागरूकता बढ़ायी जा सकती है। इसके लिए उन्होंने संबंधित विभागों एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं से पूर्ण सहभागिता की अपील की। साथ ही पोषण माह के दौरान सभी की ज़िम्मेदारी सुनिश्चित कराने के लिए उपस्थित सभी अधिकारियों को उन्होंने शपथ भी दिलाई। इस अवसर पर संयुक्त सचिव महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार आशीष श्रीवास्तव ने कहा वर्ष 2022 तक पूरे देश में कुपोषण के स्तर में कमी लाने के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत की गयी है। मिशन का मकसद प्रतिवर्ष 2 प्रतिशत की दर से बौनापन, दुबलापन एवं कम वजन में कमी करना है तथा प्रतिवर्ष 3 प्रतिशत की दर से एनीमीया के मरीजों में कमी लानी है। राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन पोषण अभियान के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए देश भर में मनाया जा रहा है। पूरक आहार को इस बार के पोषण माह का थीम बनाया गया है। बच्चों के बेहतर पोषण के लिए 6 माह तक केवल स्तनपान एवं 6 माह बाद स्तनपान के साथ पूरक आहार जरूरी होता है। कुपोषण को दूर करने के लिए शुरुआती 1000 दिनों का सही इस्तेमाल जरूरी है। जिसमें गर्भावस्था के 270 दिनों के दौरान माता का बेहतर पोषण एवं शेष बचे 730 दिनों में माता के बेहतर पोषण के साथ शिशु का नियमित स्तनपान एवं पौष्टिक पूरक आहार सुनिश्चित कराना जरूरी है। इससे कुपोषण के बढ़ते दर को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। शुरुआती 1000 दिनों के सदुपयोग के संबंध में आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। सरल एवं सहज भाषा में दी जाने वाली जानकारी से ही व्यवहार परिवर्तन संभव है। उन्होंने पूरक आहार सेवन, 6 माह तक केवल स्तनपान( ऊपर से पानी भी नहीं) एवं गर्भावस्था के दौरान पोषण पर दी जाने वाली जानकारी को सहज एवं सरल रूप में माताओं को समझाने पर ज़ोर दिया। निदेशक आईसीडीएस आलोक कुमार ने कहा पिछले वर्ष सितम्बर माह से ही पोषण माह की शुरुआत हुयी है। इसके लिए जिला स्तर से लेकर सामुदायिक स्तर पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसके संबंध में सभी जिलों को विस्तार से निर्देशित भी किया गया है।कार्यशाला के दौरान सहायक निदेशक आईसीडीएस श्वेता सहाय ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिये पोषण अभियान के उद्देश्यों एवं पोषण माह में आयोजित होने वाली गतिविधियों के विषय में विस्तार से जानकारी दी। सहायक निदेशक मध्याहन भोजन मदन लाल ने भी पोषण माह को सफ़ल बनाने में शिक्षा विभाग की सहभागिता के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया फिलहाल बिहार के 5000 स्कूलों में पोषण वाटिका का निर्माण किया गया है एवं पोषण माह के दौरान लगभग 20000 स्कूलों में पोषण वाटिका का निर्माण किया जाएगा।
