राजस्थान और आसपास के सरसों के उत्पादक राज्यों में आवक शुरू होने के साथ ही मंडियों में इसके भाव नीचे जाने लगे हैं. व्यापारियों का मानना है कि सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद जल्द शुरू करनी चाहिए ताकि बाजार संभले और किसानों का नुकसान न हो. इस साल के लिये सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,200 रूपये क्विंटल तय किया गया है जबकि बाजार में बिना मंडी शुल्क और तेल-पड़ता की शर्त वाली सरसों का भाव 3,500-3,600 रुपये क्विंटल चल रहा है. गौरतलब है कि सबसे पहले राजस्थान के कोटा में सरसों की आवक होनी शुरू हुई. इस साल सरसों की 90 लाख टन पैदावार होने का अनुमान लगाया जा रहा है. जबकि पिछले साल 80 लाख टन तक उत्पादन हुआ था. लेकिन बिडंबना यह है कि जिस देश में खाद्य तेलों की 70 प्रतिशत तक कमी है उस देश में तिलहनों का दाम समर्थन मूल्य से नीचे चल रहा है. जानकारों का कहना है कि देश में खाद्य तेलों की प्रति व्यक्ति खपत पश्चिमी देशों के 35 किलो के मुकाबले काफी कम है. देश में आज स्थिति यह है कि 235 लाख टन की कुल खपत में 160 से 170 लाख टन तेलों का आयात होता है जबकि मात्र 70 से 75 लाख टन ही देश में तैयार होता है.
