चाय की बात निकले तो असम का नाम जुबां पर आता है, लेकिन यहां हम आपको छत्तीसगढ़ के बस्तर में पैदा हो रही हर्बल चाय के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी खुशबू सात समंदर पार जा पहुंची है. जी हां, बस्तर की हर्बल टी हॉलैंड और जर्मनी आदि देशों तक अपनी पैठ बना चुकी है. खास बात यह कि इसका उत्पादन बस्तर की आदिवासी महिलाओं के समूह- मां दंतेश्वरी हर्बल प्रोडक्ट महिला समूह द्वारा किया जा रहा है. इस समूह में करीब 400 महिलाएं हैं जो चाय की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रही है. इस चाय की खासियत है कि यह 12 रोगों के लिए किसी रामबाण उपाय से कम नहीं हैं. कोंडागांव जिले के चिखलकुटी और अन्य गांव की आदिवासी महिलाओं ने हर्बल चाय का उत्पादन शुरू किया है. इस प्रयास से उन्हें भी आय का एक साधन मिला है. खास बात यह है कि इस हर्बल चाय को बनाते समय दूध और शक्कर की जरूरत नहीं पड़ती. स्टीविया से मिठास आ जाती है और लेमन ग्रास से खुशबू. गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने बस्तर की इस चाय को ब्रांड बनाने की राह दिखाई थी और आज गांव की महिलाओं ने इस सपने का साकार कर दिखाया है.
