सिकंदरा मोबाइल वाणी के विजय कुमार सिंह बता रहे है की शिक्षा कैसे बेहतर हो? शैक्षिणिक तंत्र की गुणवक्ता अच्छी न हो तो विकास की राह धीमी पड़ जाती है।हमारे देश की शिक्षा वयवस्था में अनेक समस्यां है यदि उनकी समाधान की उपाय नहीं की गई तो अर्थवयवस्था पर ख़राब असर देंगे। शासन प्रशासन के उपयोगी कदम भी धीमी है इसपर भी धयान देने की जरूरत है। वर्ष १९८९ में प्रख्यात साहित्यकार र क नारायण ने राज्यसभा में बच्चो की कंधो पर बढ़ते बोझ पर भाषण दिया था उनके इस भाषण के स्वरुप महान वैगानिक प्रोफेसर जसपाल की एनीस्थान पर घटित नीति में १९९३ में अपनी रिपोर्ट दे दी थी। वर्षो तक मीडिया, नेवसपपेर और अदालत में भी चर्चायें हुई पर सरकारी अवसर पर उन्हें स्पष्ट निर्देश जारी किये गए पर अभी ये देखना बाकि है स्कूलूं में कब तक अमल होता है। हर स्कूल में प्रति शिक्षाक पर भी विचार किया जायेगा। वर्ष २००९ के शिखा के अधिकार कानून परप्राइमरी पर ३० विद्यार्थी पर १ शिक्षक का होना अनिवार्य है और उच्च शिक्षा पर ३५ विद्यार्थी पर १ शिक्षाक अनिवार्य है। सरकारी आंकड़े के मुताबिक मौजूदा अनुपात संतोषजनक है।