बिहार राज्य के जमुई जिला के सिकंदरा प्रखंड से विजय कुमार सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि कोई भी पर्व या त्यौहार होती है, तो लोगों की आंतरिक व्यक्तिगत शुद्धि होती है।साथ ही साथ सांस्कृतिक धरोहर भी गतिशील रहती है। लोग निष्ठावान होकर किसी भी पर्व को मनाते हैं।लेकिन जिस तरह त्यौहार पर बाजारवादी व्यवस्था हावी होते जा रही है। यह किसी भी द्रृष्टि से उचित नहीं है। पर्व त्योहार के आते ही खाद्य वस्तुओं में बेतहासा वृद्धि होने लगती है और इसी के साथ शुरू होता है कालाबाज़ारी का दौर। गौरतलब है कि कालाबाज़ारी बढ़ने के बाद भी प्रशासन की ओर से भी ध्यान नहीं दिया जाता है। अत: कालाबाज़ारी को ख़त्म करने के लिए जरुरी है प्रशासन इस ओर ध्यान दे साथ ही साथ केंद्र और राज्य सरकार को भी आगे आना होगा।