झारखण्ड राज्य के दुमका ज़िला के काठीकुंड प्रखंड के ग्राम मचडेहा से बेनेडिक्ट मुर्मू मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि आजकल जलवायु को जेहरीले गैसों से हानि हो रहा है। इससे बच्चों ,मवेशियों और अन्य जीवों पर प्रभाव पड़ रहा है और इससे कई समस्या हो रही है। इससे बचने के लिए एकजुट होना ज़रूरी है। ग्राम सभा ,महिला सभा ,युवा समूह और स्कूलों में जलवायु को लेकर विशेष चर्चा करना बहुत ज़रूरी है। ताकि हमारा जल ,जंगल ,जमीन ,पर्यावरण स्वच्छ बना रहे। इसके लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाना बहुत ज़रूरी है

झारखण्ड राज्य के दुमका जिला से एलिजाबेथ सोरेन ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जलवायु परिवर्तन बहुत तेजी से हो रही है।इससे निपटने के लिए सामूहिक कार्य करने की आवश्यकता है।जलवायु परिवर्तन का प्रभाव सीधे तौर पर आजीविका,कृषि,जल,स्वास्थ्य और महिलाओं के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है।इस कठिन परिस्थिति से निपटने के लिए केवल सरकार की नही बल्कि समुदाय के प्रत्येक वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है।ग्राम सभा में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्या,जैसे - सूखा,अनियमित बारिश,जल श्रोतों का सुखना, जंगल कटाव का नियमित चर्चा करना चाहिए।सामुदायिक निर्णय के माध्यम से जल संरक्षण, वृक्ष रोपण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को प्राथमिकता देना है।महिला,किशोर और कमजोर वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना चाहिए।जलवायु परिवर्तन का प्रभाव महिलाओं पर भी देखने को मिलते हैं।जैसे - पानी लाने में कठिनाई, स्वस्थ , ईंधन संकट,इत्यादि। किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करना चाहिए और एक बार में हार नही मानना चाहिए।बल्कि निरंतर प्रयास करना चाहिए।

झारखण्ड राज्य के दुमका जिला से सरिता किस्को ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ग्राम सभा में जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करनी होगी।एक समिति बनानी होगी और कार्यक्रम आयोजित करने होंगे।महिला सभा में महिलाओं को जागरूक करना होगा।महिला समूह बनाना होगा।साथ ही वृक्षारोपण अभियान चलना होगा।स्कूलों और किशोरों के ग्रुप में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने होंगे।युवा समूह बनाना होगा और सोशल मिडिया पर अभियान चलाना होगा।समुदाय के साथ मिलकर काम करना होगा।स्थानीय संसाधनों का उपयोग करना होगा और सामुदायिक योजना बनानी होगी।

झारखण्ड राज्य के दुमका जिला से राजेश कुमार हेम्ब्रम ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जलवायु परिवर्तन एक बहुत बड़ी समस्या है। इसे कम करने के लिए व्यक्तिगत रूप से नही बल्कि सामूहिक रूप से जोर लगाना होगा। सब मिलकर प्रयास और पहल करेंगे तो जलवायु परिवर्तन की समस्या दूर हो सकता है

झारखण्ड राज्य के दुमका ज़िला के दुमका प्रखंड के ग्राम बड़ाढ़ाका से सुधीर सोरेन मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि अभी के समय में जलवायु परिवर्तन तेज़ी से हो रहा है। इसे बचाने के लिए हमें एक जुटता होना चाहिए। जलवायु को बचाने के लिए ग्राम सभा ,महिला सभा और युवाओं के साथ सामूहिक वार्तालाप करना चाहिए। जिससे जलवायु को बचाया जा सके। साथ ही हमारे आने वाली पीढ़ी को शुद्ध पेयजल और शुद्ध हवा मिल सके

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झारखण्ड राज्य के खूँटी जिला के तोरपा प्रखंड के पटपुरा बाबर टोली से हमारे श्रोता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि जल ,जमीन और पर्यावरण में बदलाव और तापमान में वृद्धि एक बड़ी समस्या है। गांव के विकास और स्वास्थय के लिए यह समस्या गंभीर है। प्राकृतिक संसाधनों,मिटटी ,पानी और हवा में प्रदुषण और असंतुलन बढ़ा है। इन समस्याओं के विकास और गांव के विकास के लिए बड़े और बुजर्गों के अनुभव और आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों का तालमेल जरूरी है। जल और जमीन का उपचार -लोगों को पुराने तालाबों की सफाई, वर्षा जल संचायन और मिटटी की जांच करा कर जैविक खेती अपनाना चाहिए। स्वच्छता और गंध का समाधान -गांव में ठोस और तरल उपशिष्ट प्रबंधन लागू करना चाहिए,खुले में कचड़ा नहीं फेंकना चाहिए और खाद के गड्ढे बनाने चाहिए। तापमान में कमी -हर साल गांव में बड़े पैमाने पर स्थानीय पौधे लगाने चाहिए। जैसे -नीम ,पीपल ,बरगद आदि लगाने चाहिए ताकि यह छाया और ऑक्सीजन प्रदान करे।बुजुर्गों से सलाह लेनी चाहिए। परंपरागत जल संरक्षण तकनीकों और स्थानीय जड़ी -बूटियों के ज्ञान का उपयोग करना चाहिए। गांव के विकास के लिए सरकारी योजनाओं जैसे -मनरेगा के तहत वृक्ष रोपण ,जल शक्ति अभियान का लाभ उठाना चाहिए। गांव के विकास के लिए फण्ड और योजनाएं पंचायत के पास आती है और लोग पोर्टल पर भी जा कर देख सकते हैं कि गांव के विकास के लिए कितना बजट आया है और कहाँ खर्च हो रहा है। तापमान कम करने के लिए सबसे सस्ता और टिकाउ साधान वृक्षा रोपण है।

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