राधू राय,जिला धनबाद के बाघमारा प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि झारखण्ड में लोकगीत विलुप्त के कगार पर है।हर क्षेत्र,प्रदेश के लिए लोक गीत हुआ करते है और क्षेत्रीय वासियों को लोकगीत पर नाज़ होता है.वही क्षेत्रीय पर्व त्योहारो पर लोक गीत गाए जाते है.झारखण्ड में भी विभिन्न समुदायों में लोकगीत काफी प्रचलित है क्योकि लोकगीत गाकर ही लोग पर्व-त्यौहार में सांस्कृतिक के अनुसार नाच-गान कर तनाव मुक्त रहते है और खुशियाँ मनाते है।लेकिन लोग आज लोक गीत गाने को शर्म महसूस करते है वही लोग अपनी सांस्कृतिक को भूलते जा रहे है.इसलिए लोक गीतों को जिन्दा रखने के लिए झारखंडी सरकार की ओर से भी पहल होने की जरुरत है क्योकि यदि इसके लिए उचित पहल नहीं की गई तो आने वाले दिनों में लोकगीत प्रायः विलुप्त हो जायेंगे।
बोकारो जिले पेटरवार प्रखंड से सुषमा कुमारी जी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि झूमर गीत झारखण्ड की संस्कृति से जुड़ी हुई है। जो आज लुप्त होने के कगार पर हैं। जब झारखंड के जनजाति के लोग बहुत ही विशेष अवसर को मनाने के लिए इकट्ठा होते हैं, चाहे घर या गांव समाज में, वे अपनी लय में झूमर गीत और नृत्य करते है।संगीत के बिना झारखंड निष्प्राण है। झारखंड के नृत्यों में प्राय: गीतों की प्रधानता होती है। झारखंडी समाज की संरचना आदिवासी सदान की संभागिता से हुई है और उन्होंने ही झूमर गीत को सराये रखा है। लेकिन आज की इस दौड़-भर में हर चीज की महंगाई बढ़ गयी है जिसके कारण लोग मनोरंजन के कार्यकर्मो को छोड़ अपने रोजगार की तलाश में लगे रहते है। झारखण्ड सरकार को झूमर गीत की ओर ध्यान देने की जरुरत है , झूमर गीत की परंपरा एवं संस्कृति को उजागर करने की जरुरत है साथ ही लोगो को प्रोत्साहित करनी चाहिए। और साथ ही जगह-जगह पर झूमर गीत का आयोजन करना चाहिए।
धनबाद से खीरु महतो जी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से लोक-गीत "झूमर" प्रस्तुत किया।झूमर गायन शैली के माध्यम से गायक अपनी ख़ुशी और उत्साह को दर्शाता एवं प्रस्तुत करता है।
धनबाद से खीरु महतो जी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से कर्ण प्रिय लोक-गीत "झूमर" प्रस्तुत किया।"झूमर"गायन झारखण्ड की पहचान है तथा झारखण्ड वासी अपने पर्व -त्योहार,उत्साह -आनंद,एवं विशेष अवसरों पर झूमर गीत गा कर अपनी भावना का इज़हार करते हैं।
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झारखण्ड राज्य के बोकारो जिले के जरीडीह प्रखंड से शिवनारायण जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि झारखण्ड की भाषा,संस्कृति और परम्परा को जीवित रखने में झूमर गीत का एक मात्र स्थान रहा है।असामाजिक,पश्चिमी सभ्यता एवं अश्लील गीतों को बढ़ावा देने के कारण झारखण्ड में झूमर गीत बिलुप्त होते जा रही है। झारखण्ड में इसलिए झूमर गीत को बढ़ावा देना बहुत जरुरी है। जिसे सुनकर झारखण्ड वासियों को हिम्मत एवं प्रेरणा मिल सके ।
धनबाद जिले के बाघमारा प्रखंड अंतर्गत महुदा ग्राम से बीरबल महतो जी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि जंगल खेत और खलियान, झूमर है झारखण्ड की पहचान। हमारा भारत विभिन्नताओं का देश है। जहाँ भारत की सांस्कृतिक अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग गीत/संगीतो की पहचान है, उसी तरह झारखण्ड की संस्कृति में झूमर गीत का एक अहम् हिस्सा है। झूमर का अर्थ झाड़-जंगल से निकली हुई ध्वनि। जंगल झारखण्ड की पहचान है तो झूमर झारखण्ड की आत्मा। झूमर नहीं तो झारखण्ड का पहचान नहीं । झूमर गीत को बचाये रखने के लिए सभी आदिवासी-मूलवासिओं को आगे आना होगा। सभी झारखंडवासियों को मिलकर झूमर गीत के प्रेम को जगाना होगा। सरकार को झूमर जैसे गीतों को आगे लाना चाहिए।
