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दोस्तों, ये कहानी है महारष्ट्र में जन्मी छाया बेन की। छाया बेन शादी के बाद अपने पति हेमकांत के साथ गुजरात चली गयी जहाँ हेमकांत के व्यापार को बचाने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया । एक ऐसा जीवन जहां वो न केवल अपने और अपने पति के लिए नाम कमा पाएं बल्कि स्वरोजगार की दुनिया में बेहतर जगह बनाने में भी कामयाब हो सके। लेकिन आखिर कैसे ? जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें

दोस्तों, उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में एक किसान परिवार में जन्मे मनोज एक अलग जीवन का सपना देखता था । एक ऐसा जीवन जहां वो न केवल अपने लिए नाम कमा पाएं और अपने माता-पिता को गौरवान्वित कर पाएं, बल्कि दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने में भी योगदान दे पाएं। लेकिन आखिर कैसे ? जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें

ग्रेजुएशन के बाद 2011 में मनोज ने नौकरी की तलाश शुरू की. एक इंटरव्यू के बाद दूसरा, फिर तीसरा और फिर अस्वीकार होने का लंबा सिलसिला... 25 इंटरव्यू और 25 बार की अस्वीकृति…. एक इंसान को तोड़ने के लिए इतनी असफलताएं काफी थीं. इस घटना ने मनोज को निराश कर दिया और उन्होंने नोएडा की एक कंपनी में फील्ड बॉय शुरू कर दिया. काम के बदले उन्हें केवल 2 हजार रुपए मिलते थे.. लेकिन ये मनोज का सपना नहीं था. आखिर उन्होंने घर वापसी का टिकिट खरीदने के लिए पैसों का इंतजाम शुरू कर दिया. आपको क्या लगता है मनोज ने अब क्या किया होगा? जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें

कोरोना ने वक्त की रफतार को कुछ धीमा कर दिया था... कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने इस दौरान अपना रोजगार तक खो दिया.. उनके बिखरते हुए सपनों को नई सांस देने के लिए उद्यम लर्निंग फाउंडेशन एक पहल कर रहा है. जिसमें एक खास कार्यक्रम कॉल-ए-कहानी के जरिए ऐसे लोगों को जानने का मौका मिलेगा, जिन्होंने मुश्किलों का सामना करते हुए मुकाम हासिल किया है.

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