जी हां आपको बता दें कि इन दिनों लगातार 5 हफ्ते से ऊपर होने के बावजूद भी बारिश नहीं होने के कारण वश किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है ऐसे में किसान बता रहे हैं कि विक्रय मूल्य से अधिक लागत मूल्य खेती में लग जाएगा आपको बता दें कि हमने कुछ किसानों से जाना भारदुआ गांव निवासी किसान हनुमान पटेल ने बताया कि बारिश न होने से धान की फसल चौपट हो ही रही है। इसका प्रभाव रबी की फसलों पर भी पड़ेगा। सबसे बड़ी समस्या तो तब होगी जब धान की फसल बचाने के लिए चल रहे पंपिंग सेट व अन्य मशीन भूगर्भ जल का स्तर घटा देंगे। वहीं उनके द्वारा ये भी बताया कि धान की फसल बचाने के लिए हर सप्ताह खेत में पानी चलाना पड़ रहा है। पंपिंगसेट से पानी चलाने के लिए 90 रुपये प्रति लीटर डीजल के हिसाब से एक एकड़ में करीब 1,200 रुपये खर्च पड़ रहा है। ऐसे में मशीन के सहारे धान की फसल बचाने में तैयार उपज की कीमत से ज्यादा की लागत लग जाएगी। खदौली गांव निवासी किसान वसीम ने बताया कि बारिश न होने से खेत में खर पतवार का बहुत अधिक प्रकोप है। खर-पतवार नाशक दवाओं से काम नहीं चल पा रहा है। खेत की सिंचाई के साथ ही मजदूर लगाकर खेत की निराई भी करानी पड़ रही है। ऐसे में बारिश न होने के कारण किसानों के ऊपर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
