एक बार फिर मकर संक्रांति दो दिनों के फेर फंसा है। लेकिन, पंचागों के अनुसार मकर राशि के सूर्य और पुण्यकाल को ध्यान में रखकर अधिकतर शुक्रवार 14 जनवरी और कुछ लोग 15 जनवरी त्योहार मनाएंगे। पुण्कालय को मानते हुए पूजा-पाठ और दान के बाद चूहा-दही और तिलकुट आदि का मजा लेंगे। शास्त्र व पंचागों के अनुसार पुण्यकाल में चूड़ा-दही व तिल खाना शुभ होगा। हालांकि वर्षों से चली आ रही 14 जनवरी वाली परंपरा को मानने वाले इस दिन चूड़ा-दही का मजा लेंगे। आचार्य नवीनचंद्र मिश्र वैदिक व डा. कमलेश मिश्र ने बताया कि पंचांगकार ग्रंथिय प्रमाण के आधार पर संक्रांति प्रवेश काल से 8 या 16 घंटा पहले या बाद पुण्यकाल होता है। कुछ पंचागों के अनुसार शुक्रवार की दोपहर में मकर राशि में सूर्य प्रवेश कर रहे हैं। इस कारण 8 घंटे पहले पुण्कायलय मानते हुए 14 जनवरी की सुबह से मकर संक्रांति मना सकते हैं। वहीं कुछ पंचागों के अनुसार 14 की ही रात 8 से 8.50 बजे के बीच मकर राशि के सूर्य हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में 16 घंटा पहले का पुण्यकाल मानते हुए भी 14 जनवरी को चूड़ा-दही-तिलकुट खा सकते हैं। लेकिन, कुछ लोग रात में मकर राशि करने और उसके बाद पुण्यकाल मानते हुए दूसरे दिन यानी 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाएंगे।
