धान के कटोरा के रूप में चर्चित इस जिले में गत पांच दिनों से हो रही बारिश से कहीं किसान बाग-बाग हो रहे हैं, तो कहीं बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पानी की उपलब्धता से कृषि विभाग द्वारा पूरे जिले में धान की रोपनी के लिए तय लक्ष्य 1.94 लाख हेक्टेयर को प्राप्त करने के करीब है। हालांकि नहरी क्षेत्र में कई जगहों पर खेतों में ज्यादा पानी भर जाने से रोपी गई फसल की क्षति होने की आशंका बढ़ गई है। खाद की कालाबाजारी तैसी समस्याओं से किसानों को जूझना न पड़े, इसके लिए विभाग चौकस है। किसान रामेश्वर राम ने कहा कि मानसून की सक्रियता से जिले के दक्षिणी क्षेत्र में भी रोपनी का अंतिम चरण में है। जहां नहर की सुविधा नहीं है, वहां भी इस समय पानी की कोई दिक्कत नहीं है। कई वर्ष के बाद ऐसा संयोग बना है कि समय से खेतों में धान की रोपनी पूरी होने की रही है। इस वर्ष अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है।
