बढ़ती महंगाई ने आर्थिक रूप से कमजोर गैस उपभोक्ताओं के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। डीजल व पेट्रोल की कीमत बढऩे से माल ढुलाई का खर्च बढ़ा तो खाद्य सामग्री के दाम आसमान पर पहुंच गए। अब रसोई गैस की कीमत में फिर से 25.50 रुपये वृद्धि होने से किचन में आग लग गई है। गैस का दाम बढऩे से जहां गृहस्थी पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, वहीं बजट एवं व्यंजन का जायका बिगडऩे लगा है। उज्ज्वला योजना के अधिकांश उपभोक्ताओं ने सिलेंडर में गैस भरवाना बंद कर पारंपरिक संसाधन लकड़ी, गोंइठा व कोयला की ओर बढ़ चले हैं।