बिहार के पूर्व डीजीपी और जदयू नेता गुप्तेश्वर पांडेय इन दिनों नई भूमिका में दिख रहे हैं। वे इन दिनों मठ-मंदिरों और धार्मिक सत्संग में मन लगा रहे हैं। कभी खाकी और फिर खादी में दिखने वाले पांडेय आजकल गेरुआ वस्त्र धारण कर प्रवचन दे रहे हैं। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार का डीजीपी रहते अपनी नौकरी से त्यागपत्र (वीआरएस) ले लिया था। इसके बाद उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से नाता जोड़ा था तो लोग कयास लगाए जा रहे थे कि वे विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे और उन्हें अगली सरकार में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि इन दोनों से कोई बात सही नहीं साबित हुई। धार्मिक मंचों पर समझा रहे जीवन का मर्म बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ ही दिन पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेते हुए राजनीति में आने वाले पूर्व डीजीपी अब धार्मिक मंचों पर कथावाचन कर लोगों को जीवन का मर्म समझा रहे हैं। इन दिनों रामभक्त हनुमान की भक्ति में लीन हैं। भाव भी बदल गया है, भूमिका भी नई। अब न पुलिसिया रौब है, न ही सियासत का पेंच। सुबह भगवान के भजन से होती है और देर शाम तक यह सिलसिला जारी रहता है। चुनाव नहीं लड़ पाने का मलाल पूर्व में जरूर रहा था। इसे वे परोक्ष रूप से जाहिर भी कर चुके हैं, पर वे अब मोह-माया से मुक्ति की राह बता रहे। खाकी और खादी के बाद अब गेरुआ में उनका नया रूप चर्चा का विषय बना हुआ है।
