नालंदा में नए एसपी ने दिया योगदान क्राइम व खनन माफिया और साइबर क्राइम पर रहेगी पैनी नजर बिहारशरीफ :- मानव जीवन काल में आपका कर्तव्य ही आपकी पहचान होती है.बिहार सरकार के गृह विभाग ने एक साथ 38 आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया जिसके तहत कई जिलों के पुलिस अधीक्षक भी बदले गए इन पुलिस अधीक्षक में कुछ ऐसे भी आईपीएस अधिकारी हैं जो अपनी कार्य शैलियों से हमेशा सुर्खियों में रहे. चाहे वह मुंगेर गोलीकांड की बात हो या नालंदा में बढ़ते क्राइम ग्राफ की. बिहार सरकार के इस तबादला में नालंदा के पुलिस अधीक्षक निलेश कुमार का भी तबादला किया गया और इन्हें पटना एसटीएफ का एसपी बनाया गया जबकि नालंदा के नए पुलिस कप्तान के रूप में नवादा पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी सेवा दे रहे हरिप्रसाद एस को नियुक्त किया गया. पुराने एसपी निलेश कुमार का तबादला और नए एसपी हरिप्रसाद का आगमन से जिले वासियों के चेहरे पर मुस्कान आ गई और जिलेवासी एक उम्मीद के साथ यह आशा कर रहे हैं कि नए एसपी के आगमन से जिले में क्राइम का ग्राफ कैसा रहता है यह तो इनका कार्यकाल ही बताएगा क्योंकि पिछले वालों ने इतना कचरा ही फैला दिया है की चुनौतियां तो निश्चित है. नए एसपी के लिए क्या-क्या होगी चुनौतियां क्राइम कंट्रोल पर काबू पाना पहली प्राथमिकता जिले में बढ़ते क्राइम ग्राफ पर काबू पाना नए एसपी के लिए प्राथमिक तौर पर चुनौती है क्योंकि नए सरकार गठन के बाद जिस प्रकार से अपराधी बेलगाम हो गए हैं और इन अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने थोक दर से आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया है जिसके तहत नालंदा को नया पुलिस कप्तान मिला और इस कप्तान को जिले में क्राइम कंट्रोल करना एक चुनौती ही होगा. खनन माफियाओं से निपटना भी एक अति संवेदनशील चुनौती नालंदा जिले के कई ऐसे थाना क्षेत्र हैं जो खनन माफियाओं के आतंक के लिए हमेशा सुर्खियों में रहा है जहां खनन माफियाओं का राज चलता है अवैध बालू और मिट्टी धंधे बाजो पर कार्रवाई करना भी नए एसपी के लिए चुनौती होगा क्योंकि जिस प्रकार से जिले में अवैध खनन का कारोबार बढ़ा है कहीं ना कहीं इसके पीछे अपनों का ही हाथ नजर आता है और इनसे निपटना भी नए पुलिस अधीक्षक के लिए एक चुनौती होगी. कई कांडों का उद्भेदन नालंदा में पिछले पुलिस कप्तान के समय कई ऐसे वारदात को अंजाम दिया गया है जिसका अभी तक खुलासा नहीं हो सका और नए एसपी के लिए इन कांडों का उद्भेदन भी एक चुनौती ही होगा क्योंकि कुछ ऐसे भी अनभिज्ञ केसेस हैं जिनको सुलझा पाना उड़ती चिड़िया के पंख में हल्दी लगाने के बराबर है. जिले के कई ऐसी घटनाएं हैं जिसका महीनों बीत जाने के बाद भी खुलासा नहीं हो सका.इतना ही नहीं उस घटना में संलिप्त कोई बदमाश भी अब तक गिरफ्तार नहीं किए जा सके हैं. साइबर क्राइम का भी गढ़ है नालंदा नालंदा जिले का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका कतरीसराय साइबर क्राइम का एक गढ़ माना जाता है. नालंदा के नए पुलिस अधीक्षक के लिए साइबर क्राइम भी एक बहुत बड़ी चुनौती होगी. ठग के इस नगरी में ठगी का धंधा को जड़ से समाप्त करने की तो बात दूर है लेकिन कहीं न कहीं इस धंधा को कम करना भी एक चुनौती है क्योंकि कतरी सराय में थाना का भी निर्माण कराया जा चुका बावजूद यह धंधा कम होने का नाम नहीं ले रहा. अब नए एसपी किस रूप में इस अपराध को चुनौती के रूप में लेते हैं यह तो देखने की बात है. जिस प्रकार से इन दिनों अपराध में वृद्धि हुई है कहीं ना कहीं प्रत्येक जिलों में नए एसपी के लिए अपराध पर काबू पाना एक चुनौती होगा क्योंकि सत्ता की हनक और राजनैतिक रहनुमाओं का दबदबा भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पुलिस महकमा में देखा जाता है जिसके कारण ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ पुलिस पदाधिकारियों को कर्तव्य का निर्वहन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और यही कारण है कि बेहतर पुलिसिंग और कुशल नेतृत्वकर्ता पुलिस अधिकारियों को ज्यादा समय तक कप्तान का नेतृत्व करने का मौका नहीं मिल पाता है. हिन्दुस्थान समाचार/प्रमोद पाण्डेय
